प. बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाना संवैधानिक स्वतंत्र का उल्लंघन: पर्सनल लॉ बोर्ड

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प. बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाना संवैधानिक स्वतंत्र का उल्लंघन: पर्सनल लॉ बोर्ड

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 09:20 PM IST

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान वंदे मातरम् के सभी छंदों का पाठ अनिवार्य करने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह लोगों की धार्मिक पहचान तथा संवैधानिक स्वतंत्रता का हनन है।

बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को इस निर्णय से संबंधित अधिसूचना को वापस लेना चाहिए।

उनका कहना है कि सरकार का यह निर्देश ‘बिजॉय इमैनुएल बनाम केरल राज्य’ के मामले में आए उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के विपरीत है, जिसमें शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी भी नागरिक को राष्ट्रीय या धार्मिक समारोह में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

इलियास ने कहा, ‘‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह स्पष्ट करना जरूरी समझता है कि वंदे मातरम् के कुछ छंदों में ऐसी अवधारणाएं हैं जिन्हें मुसलमान एकेश्वरवाद (तौहीद) के इस्लामी सिद्धांत के साथ असंगत मानते हैं। इसलिए, मुस्लिम छात्रों को गाना सुनाने के लिए मजबूर करना उनकी धार्मिक पहचान और संवैधानिक स्वतंत्रता पर सीधा उल्लंघन है।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक धर्मनिरपेक्ष राज्य को एक समुदाय की धार्मिक या सांस्कृतिक परंपराओं को दूसरे पर नहीं थोपना चाहिए।

भाषा हक हक पवनेश

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