मालवीय नगर अग्निकांड: होटल में अवैध रूप से बनाई गई थी कई मंजिल, नहीं थी अग्नि संबंधी एनओसी

मालवीय नगर अग्निकांड: होटल में अवैध रूप से बनाई गई थी कई मंजिल, नहीं थी अग्नि संबंधी एनओसी

मालवीय नगर अग्निकांड: होटल में अवैध रूप से बनाई गई थी कई मंजिल, नहीं थी अग्नि संबंधी एनओसी
Modified Date: June 3, 2026 / 10:35 pm IST
Published Date: June 3, 2026 10:35 pm IST

नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार को जिस होटल में आग लगने से कम से कम 21 लोगों की मौत हुई, उसमें निर्धारित क्षमता से करीब चार गुना ज्यादा लोगों को ठहराया जा रहा था और उसके पास जरूरी अग्नि सुरक्षा मंजूरी भी नहीं थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों को सूचित किए बिना ही इमारत में अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया था।

इस अग्निकांड में मारे गए लोगों में 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 35 घायलों में से कम से कम 19 की हालत गंभीर बनी हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि आग मालवीय नगर के हौज़ रानी स्थित ‘‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में सुबह करीब 8.30 बजे लगी। यह आग पांच मंजिला संकरी इमारत में तेजी से फैल गई, जिसमें आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था, खिड़कियां स्थायी रूप से बंद थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर से संचालित था।

अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी कारकों ने मिलकर इमारत को जानलेवा भवन बना दिया था।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि दिल्ली सरकार की ‘बेड-एंड-ब्रेकफास्ट’ नीति के तहत इस प्रतिष्ठान को केवल छह कमरों की अनुमति थी, लेकिन यह कथित तौर पर लगभग 25 कमरों का संचालन कर रहा था, जिसमें तहखाने के कुछ कमरे भी शामिल हैं।

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि करीब छह से सात साल पहले इस इमारत में केवल भूतल और एक मंजिल थी, जब अग्नि सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती थी। बाद में अधिकारियों को सूचित किए बिना कथित तौर पर अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई। अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद कभी भी पूरी भवन योजना को जमा नहीं किया गया।

बताया जा रहा है कि इमारत की ऊंचाई 15 मीटर से अधिक थी, जिससे अग्नि सुरक्षा मंजूरी या अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अनिवार्य हो गया था। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि उन्हें न तो आवश्यक दस्तावेज मिले और न ही मालिक की ओर से कोई जवाब मिला, और कभी भी कोई अग्नि सुरक्षा मंजूरी जारी नहीं की गई थी।

इस इमारत के भूतल पर एक रेस्तरां था जबकि तहखाने और ऊपरी मंजिलों का उपयोग होटल के रूप में किया जा रहा था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आग संभवतः भूतल पर रेस्तरां में एक खानसामे के आने और काम शुरू करने से पहले बिजली के उपकरण चालू करने के कुछ ही देर बाद लगी। इसके तुरंत बाद कथित तौर पर विस्फोट जैसी आवाज सुनी गई, जिसके बाद लपटें तेजी से फैल गईं।

उप मुख्य दमकल अधिकारी ए के मलिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘जहां तक अग्नि संबंधी का सवाल है, हमें न तो इमारत के पदााधिकारियों से और न ही लाइसेंसिंग एजेंसी से कोई संदर्भ प्राप्त हुआ था।’

अधिकारियों ने कहा कि मालिक ने ट्रेड लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन पूरी भवन योजना जमा नहीं की गई थी। मालिक से भवन विभाग को योजना उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था, जिसे दमकल विभाग के साथ साझा करना आवश्यक था, लेकिन यह प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हुई।

मलिक ने कहा कि इमारत के डिजाइन के कारण लोगों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया।

उन्होंने कहा, ‘इस तरह की इमारतें एक शाफ्ट की तरह काम करती हैं, जहां आग से पैदा होने वाली तपिश और धुआं कुछ ही सेकंड में पूरी संरचना को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे लोगों को बाहर निकालना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।’

इमारत में भूतल और ऊपरी मंजिलों में एक सीढ़ी थी जबकि तहखाने में दो सीढ़ियां थीं। इस अभियान में करीब 80 दमकलकर्मी शामिल थे, जिसमें एक दमकलकर्मी घायल हो गया जबकि दूसरे को धुआं के कारण बाहर निकालना पड़ा।

बचाव दलों ने तहखाने का शटर खोलने के लिए कटर का उपयोग किया और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बंद खिड़कियों को तोड़ने के लिए हथौड़ों का इस्तेमाल किया।

पुलिस ने इस घटना के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गैर-इरादतन हत्या और अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

एक पुलिस सूत्र ने बताया कि टीमों ने इमारत के मालिक और पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत लाइसेंस धारक के आवासों सहित कई स्थानों पर छापेमारी की है।

सूत्र ने कहा, ‘आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें छापेमारी कर रही हैं। उन्हें भागने से रोकने के लिए रेलवे और हवाई अड्डा अधिकारियों के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है।’

जांचकर्ताओं के अनुसार, इमारत के मालिक की पहचान लवकेश बजाज (50) के रूप में हुई है और पर्यटन विभाग का लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी किया गया था।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह होटल तीन साझेदारों द्वारा चलाया जा रहा था, जिनके बारे में माना जाता है कि दिल्ली भर में उनके कई अन्य होटल और गेस्टहाउस हैं।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि बजाज एक ऐसी फर्म से भी जुड़ा है जिसके बारे में माना जाता है कि वह निर्माण संबंधी गतिविधियों में शामिल है, और जांचकर्ता जांच के हिस्से के रूप में उनके व्यावसायिक हितों की जांच कर रहे हैं।

आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने हर एक पहलू से मामले की जांच के लिए 20 से अधिक टीमें गठित की हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी और उसकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया है, जो आग की घटना के तुरंत बाद फरार हो गए थे।

हालांकि पुलिस ने देर शाम बजाज और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया।

एम्स दिल्ली की मीडिया प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. रीमा दादा ने बताया कि आग की घटना के बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर में 13 मरीजों को लाया गया, जिनमें से तीन इमारत से कूदने के कारण घायल हुए थे।

घायल हुए तीन लोगों में से दो चिकित्सा सलाह के खिलाफ अस्पताल से चले गए और जाने तक उनकी हालत स्थिर थी, जबकि तीसरी मरीज एक महिला है जिसके सिर में चोट लगी है, उसकी सर्जरी की गई है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

उन्होंने बताया, ‘अन्य दस लोग दिल्ली पुलिस के कर्मी थे जो बचाव अभियान में शामिल थे; सभी स्थिर हैं, निगरानी में हैं और जल्द ही उन्हें छुट्टी मिलने की संभावना है। इसके अलावा, अस्पताल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक में तीन शव आए।’

भाषा नोमान नोमान पवनेश

पवनेश


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