घुसपैठियों को बचाने के लिए कोलकाता में धरने पर बैठ गयी हैं ममता बनर्जी: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
घुसपैठियों को बचाने के लिए कोलकाता में धरने पर बैठ गयी हैं ममता बनर्जी: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, छह मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए कोलकाता के मध्य में धरना देने का आरोप लगाया।
सिंह ने यहां एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार जल्द ही सत्ता से बाहर हो जाएगी। उन्होंने ‘तृणमूल कांग्रेस द्वारा संरक्षित राज्य के पक्षपाती सरकारी अधिकारियों और गुंडों’ को चेतावनी दी कि वे अपना रवैया सुधार लें , वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘बनर्जी को सिर्फ मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले घुसपैठियों को बचाने में दिलचस्पी है, जो उनके वोट बैंक का बड़ा हिस्सा हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए कि वे एस्प्लेनेड इलाके में घुसपैठियों को बचाने के लिए धरना दे रही हैं, जिनकी मदद से उन्होंने पिछला चुनाव जीता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।’’
उन्होंने दावा किया कि राज्य को दिया गया 15 लाख करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान तृणमूल पदाधिकारियों ने हड़प लिया गया है ‘जिन्होंने आलीशान घर बना लिये हैं और 15 वर्षों में उनके पास साइकिल से अब महंगे चार पहिया वाहन आ गये हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया, “पहले औद्योगिक विकास दर 25 प्रतिशत थी, जो अब घटकर तीन प्रतिशत रह गई है, क्योंकि पिछले 15 वर्षों में राज्य में पैदा हुए बच्चों के सिर पर 80,000 करोड़ रुपये का बोझ है।”
केंद्रीय कपड़ा मंत्री सिंह ने कहा कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने राज्य में “गुंडागर्दी” को बढ़ावा दिया है।
उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस की बाहुबली और धमकियां अब सफल नहीं होगी, क्योंकि भाजपा ऐसी किसी भी रणनीति का करारा जवाब देगी।”
बाद में सिंह ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के नारायणगढ़ में भाजपा की परिवर्तन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
केसरिया रंग में लिपटे फूलों से सजे ट्रकों वाली यह रैली, विधानसभा चुनाव से पहले जन संपर्क कार्यक्रम के तहत भाजपा द्वारा एक से 10 मार्च तक पूरे बंगाल में निकाली जा रही नौ ‘परिवर्तन यात्राओं’ में से एक थी।
भाषा
राजकुमार रंजन
रंजन

Facebook


