ममता ने मोदी पर साधा निशाना, उनके भाषणों को ‘झूठ का पुलिंदा’ बताया

ममता ने मोदी पर साधा निशाना, उनके भाषणों को 'झूठ का पुलिंदा' बताया

ममता ने मोदी पर साधा निशाना, उनके भाषणों को ‘झूठ का पुलिंदा’ बताया
Modified Date: April 18, 2026 / 07:54 pm IST
Published Date: April 18, 2026 7:54 pm IST

कोलकाता, 18 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र को संबोधित करने से पहले उन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके भाषणों से गरीबों को कोई राहत नहीं मिली और वे ‘झूठ का पुलिंदा’ मात्र हैं।

दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं सुन रही हूं कि प्रधानमंत्री एक बार फिर देश को संबोधित करेंगे और फिर से झूठों का एक और जाल बुनेंगे। लोग उनके भाषण सुनकर राशन नहीं पाएंगे। उनके भाषण सिर्फ झूठों का पुलिंदा हैं।’’

भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित कराने में विफल रहने के एक दिन बाद, मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

इस विधेयक के तहत, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कवायद के बाद, 2029 के संसदीय चुनाव से पहले संसद तथा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना था।

इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका।

शुक्रवार रात लोकसभा में विधेयक पर हुए मतदान के दौरान 298 सदस्यों ने इसके समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया।

बनर्जी ने भाजपा पर व्यापक राजनीतिक हमला करते हुए आरोप लगाया कि जो लोग कभी सांप्रदायिक तनाव भड़काते थे, वे अब देश की बागडोर संभाल रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘भाजपा शासन में, जो लोग कभी दंगे भड़काते थे, वे अब देश के नेता बन गए हैं।’

नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी का हवाला देते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख बनर्जी ने कहा कि भारत के सच्चे नेता एकता और सद्भाव के लिए खड़े रहे।

उन्होंने कहा, “इस राष्ट्र के वास्तविक नेता हमेशा बोस और महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्व रहे हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और सद्भाव के आदर्शों के माध्यम से देश को एकजुट किया, न कि वे लोग जो विभाजन, घृणा और हिंसा पर पनपते हैं।”

भाषा अमित रंजन

रंजन


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