एसआईआर पर ममता बनर्जी के आरोप निराधार : शुभेंदु अधिकारी

एसआईआर पर ममता बनर्जी के आरोप निराधार : शुभेंदु अधिकारी

एसआईआर पर ममता बनर्जी के आरोप निराधार : शुभेंदु अधिकारी
Modified Date: January 11, 2026 / 05:46 pm IST
Published Date: January 11, 2026 5:46 pm IST

कोलकाता, 11 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लगाए गए आरोपों को ‘‘निराधार’’ बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर राजनीतिक कारणों से एसआईआर प्रक्रिया को पटरी से उतारने का आरोप लगाया।

अधिकारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह भी कहा कि उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है और दावा किया कि एसआईआर से ‘मतदाता सूचियों में व्याप्त भ्रष्टाचार- फर्जी प्रविष्टियों, दोहराव वाले नामों और घुसपैठियों का पर्दाफाश हो रहा है, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस की देखरेख में वर्षों से पाला-पोसा गया।’

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ‘‘तृणमूल की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही है’’, इसीलिए मुख्यमंत्री इस तरह का हंगामा कर रही हैं।

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बनर्जी ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया रिकॉर्ड सुधारने के बजाय मतदाताओं के नाम हटाने का जरिया बन गई है।

एसआईआर की शुरुआत के बाद से कुमार को लिखे अपने तीसरे पत्र में, मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग पर इस प्रक्रिया के दौरान ‘राजनीतिक पूर्वाग्रह, असंवेदनशीलता और मनमानी’ का आरोप लगाया।

अधिकारी ने पोस्ट में आरोप लगाया, ‘‘मैं एक बार फिर दोहराना चाहूंगा कि उनके दावे इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पटरी से उतारने का एक हताश प्रयास मात्र हैं, जो मतदाता सूचियों में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर रही है। इन सूचियों में फर्जी प्रविष्टियां, दोहराव वाले नाम और घुसपैठिओं के नाम थे, जिन्हें तृणमूल की देखरेख में वर्षों से पाला-पोसा गया।’’

विपक्ष के नेता ने 10 जनवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे अपने पत्र में मुख्यमंत्री की आपत्तियों को एसआईआर को बाधित करने का ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रयास’ बताया और निर्वाचन आयोग के इस कदम को राज्य में ‘स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी’ चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बताया।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया, ‘‘मुख्यमंत्री द्वारा इस कवायद को ‘अनियोजित, असंवेदनशील और अमानवीय’ बताना घोर अतिशयोक्ति से कम नहीं है, जिसे जनता में उन्माद पैदा करने और अपनी सरकार की विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।’’

निर्वाचन आयोग ने 16 दिसंबर को एसआईआर के पहले चरण के बाद मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित किया, जिसमें 58 लाख से अधिक नाम हटाए जाने के बाद मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हो गई।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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