मणिपुर कांग्रेस ने विशेष पैकेज और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की मांग की
मणिपुर कांग्रेस ने विशेष पैकेज और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की मांग की
इंफाल, तीन फरवरी (भाषा) मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष केशम मेघचंद्र ने मंगलवार को केंद्रीय बजट की आलोचना करने के साथ ही केंद्र से राज्य के लिए एक विशेष संकट पैकेज की घोषणा करने, पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की मांग की।
मेघचंद्र ने यहां पत्रकारों से कहा कि केंद्रीय बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जो राज्य में जारी संकट की गंभीरता को दर्शाता हो।
मणिपुर में तीन मई, 2023 से जातीय हिंसा देखी जा रही है। उस समय पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में एक आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था।
तब से हिंसा में कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों सहित कम से कम 260 लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। राज्य में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘ऐसे समय में जब हमारा राज्य विस्थापन, आर्थिक संकट और गंभीर सामाजिक अशांति से जूझ रहा है, लोगों को निर्णायक राष्ट्रीय समर्थन की उम्मीद थी। इसके बजाय, हमें केवल चुप्पी देखने को मिल रही है। न तो कोई विशेष पैकेज जारी किया गया है, न ही कोई पुनर्निर्माण अभियान, न ही रोजगार योजना और न ही ऐसा कुछ किया गया है जो जमीनी स्तर पर संकट की गंभीरता को दर्शाता हो।’
मेघचंद्र ने जोर देकर कहा कि मणिपुर जिम्मेदारी की मांग कर रहा है, भीख नहीं मांग रहा है।
मेघचंद्र ने कहा, “एक राष्ट्र जो वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा रखता है, वह अपनी एकता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य की उपेक्षा नहीं कर सकता। केंद्र को विशेष संकट पैकेज की घोषणा, पुनर्वास में तेजी, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और आजीविका बहाल करके इस चूक को तुरंत दूर करना चाहिए।”
उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार समावेशी विकास की बात कैसे कर सकती है, जबकि वह एक ऐसे राज्य की अनदेखी कर रही है जिसे तत्काल सुधार और पुनर्निर्माण की जरूरत है।
वांगखेम सीट से विधायक ने कहा, “पूर्वोत्तर के लिए नियमित योजनाओं को जारी रखना कोई विशेष ध्यान देना नहीं है। मणिपुर को तत्परता, राजनीतिक संवेदनशीलता और साहसिक हस्तक्षेप की जरूरत थी। हमें नया कुछ नहीं मिला।”
उन्होंने दावा किया, ‘आंकड़ों के लिहाज से बजट भले ही भारी भरकम हो, लेकिन यह देखकर दुख लगता है कि मणिपुर के लिए बहुत कम है।’
भाषा तान्या नरेश
नरेश

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