मणिपुर हिंसा में सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता की दो साल बाद मौत, न्याय की मांग उठी
मणिपुर हिंसा में सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता की दो साल बाद मौत, न्याय की मांग उठी
चूराचंद्रपुर, 19 जनवरी (भाषा) मणिपुर में उस कुकी महिला की हाल में बीमारी से मौत हो गई जिसके साथ राज्य में जातीय हिंसा के दौरान मई 2023 में सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। सामूहिक बलात्कार के बाद के आघात से कथित तौर पर जुड़ी बीमारी से पीड़िता की मौत के बाद कई कुकी संगठनों उसके लिए न्याय की मांग की।
दिल्ली और मणिपुर के चूराचंद्रपुर के कुकी संगठनों ने दावा किया कि उस महिला का मई 2023 में इम्फाल में अपहरण करके सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। हालांकि, वह अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बच निकलने में कामयाब रही, लेकिन सदमे और चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाई और गुवाहाटी में उपचार के दौरान 10 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
इन संगठनों ने दावा किया कि उनका मेइती समुदाय के साथ मिलकर रहना संभव नहीं है और कुकी समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन की मांग भी की।
इम्फाल घाटी में रहने वाले मेइती समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच मई 2023 से हुई जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। राज्य में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है।
कुकी समूह, ‘इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम’ (आईटीएलएफ) ने एक बयान में कहा, ‘‘उसकी (महिला की) मृत्यु, कुकी-ज़ो समूह को जिस क्रूर तरीके से निशाना बनाया गया है, उसका एक और दर्दनाक प्रमाण है।’’
आईटीएलएफ ने कहा कि कुकी-ज़ो समुदाय के पास ‘‘अपनी सुरक्षा, गरिमा और अस्तित्व के लिए एक अलग प्रशासन की मांग करने के अलावा अब कोई विकल्प नहीं बचा है’’।
‘कूकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन’ (केएसओ) दिल्ली एंड एनसीआर ने आरोप लगाया कि अपराध की गंभीरता और नागरिक समाज संगठनों द्वारा बार-बार की गई अपीलों के बावजूद, अपराधियों के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई।
केएसओ दिल्ली एंड एनसीआर ने कहा, ‘‘हम स्पष्ट रूप से यह कहना चाहते हैं कि उसकी मृत्यु को आधिकारिक तौर पर 2023 में उसके खिलाफ हुई हिंसा का परिणाम माना जाना चाहिए। इसे अन्यथा मानने का कोई भी प्रयास न्याय से इनकार और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के समान होगा।’’
कुकी जनजाति की महिलाओं के एक समूह ने कहा कि पीड़िता को न केवल उसके साथ हुए अन्याय के लिए याद किया जाएगा, बल्कि अकल्पनीय क्रूरता के सामने उसके साहस के लिए भी याद किया जाएगा।
कुकी-जो वूमेन्स फोरम, दिल्ली एंड एनसीआर ने एक बयान में कहा, ‘‘लगभग तीन साल तक, उसने ऐसा दर्द सहा जो किसी भी इंसान को कभी नहीं सहना चाहिए।’’
भाषा यासिर अमित
अमित

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