सबसे पहले मनमोहन सिंह ने रखा था ब्रिक्स विकास बैंक का विचार: कांग्रेस

सबसे पहले मनमोहन सिंह ने रखा था ब्रिक्स विकास बैंक का विचार: कांग्रेस

सबसे पहले मनमोहन सिंह ने रखा था ब्रिक्स विकास बैंक का विचार: कांग्रेस
Modified Date: September 10, 2026 / 03:59 pm IST
Published Date: September 10, 2026 3:59 pm IST

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले बृहस्पतिवार को इस समूह के गठन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने पहली बार 2012 में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी और उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ब्रिक्स विकास बैंक बनाने का विचार रखा था।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि मुख्य रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पहल पर सितंबर 2006 में इस समूह के चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में मुलाकात की थी और आपस में विभिन्न प्रकार के संपर्क एवं सहयोग विकसित करने का निर्णय लिया था।

उन्होंने कहा कि पहला ‘ब्रिक शिखर सम्मेलन’ जून 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह ने भाग लिया था।

रमेश ने इस बात उल्लेख किया कि सितंबर, 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद ब्रिक ‘ब्रिक्स’ बन गया।

वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने, जबकि एक साल बाद इंडोनेशिया इसमें शामिल हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘समूह की अध्यक्षता हर साल बदलती है। भारत ने पहली बार 29 मार्च, 2012 को नयी दिल्ली में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इसी बैठक में डॉ. मनमोहन सिंह ने ब्रिक्स विकास बैंक बनाने का विचार रखा था।’’

रमेश के अनुसार, जुलाई 2014 में यह संस्था अस्तित्व में आई और इसका मुख्यालय शंघाई में रखा गया। इसे न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) नाम दिया गया तथा जाने-माने बैंकर के. वी. कामथ इसके पहले अध्यक्ष बने।

उन्होंने कहा कि इसके बाद से भारत ने विभिन्न राज्यों में विकास परियोजनाओं के लिए एनडीबी से करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण लिया है।

रमेश की यह टिप्पणी शनिवार से भारत की मेजबानी में शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आई है।

नयी दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी तथा ट्रंप प्रशासन की व्यापार एवं शुल्क नीतियों के प्रतिकूल प्रभावों से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सहित कई प्रमुख नेताओं के महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।

भाषा हक हक रंजन

रंजन


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