(प्रदीप्त तापदार)
(फोटो के साथ)
कोलकाता, 30 मई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में भाजपा की जीत के बाद पार्टी में शामिल होने के इच्छुक कई मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सांसदों और विधायकों के लिए फिलहाल दरवाजे बंद हैं, लेकिन भविष्य में बेदाग नेताओं के प्रवेश की संभावना खुली है। उन्होंने कहा कि राजनीति में ‘‘दो और दो हमेशा चार नहीं होते’’।
‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में भट्टाचार्य ने कहा कि अपने दम पर स्पष्ट जनादेश हासिल करने के बाद पार्टी पर अब प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं को शामिल करने का कोई दबाव या मजबूरी नहीं है। उन्होंने ‘‘अच्छी तृणमूल कांग्रेस’’ और ‘‘बुरी तृणमूल कांग्रेस’’ के बीच किसी भी तरह के अंतर को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर हुए दलबदल के अपने अनुभव से सबक सीखा है और भविष्य में उनसे मिली सीख को ध्यान में रखेगी।
बंगाल में राजनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि मुसलमानों को यह समझना चाहिए कि अल्पसंख्यक वोट पर निर्भर हुए बिना भी सरकारें बनाई जा सकती हैं और उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा के दो-तिहाई बहुमत ने राज्य के चुनावी समीकरण को बदल दिया है।
किसी नेता का नाम लिए बिना और कोई संख्या बताए बिना भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद और विधायक हमारे साथ जुड़ने को तैयार हैं, लेकिन मैं संख्या पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।’’
उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा को बाहरी नेताओं की ज्यादा जरूरत नहीं है। भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘अभी दरवाजे बंद है। हमें चुनाव जीतने के लिए अब किसी तृणमूल कांग्रेस नेता की जरूरत नहीं है। हम अपने दम पर जीते हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या भविष्य में पार्टी का रुख बदल सकता है, तो भट्टाचार्य ने सावधानी पूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘राजनीति में, दो और दो हमेशा चार नहीं होते; हम किसी भी दागी नेता के लिए अपने दरवाजे नहीं खोलेंगे… यह फैसला सामूहिक होगा, किसी एक व्यक्ति का नहीं।’’
उन्होंने कहा कि अगर पार्टी आखिरकार नए सदस्यों पर विचार करती भी है, तो भ्रष्टाचार के आरोपों, भर्ती घोटालों में संलिप्तता या तृणमूल कांग्रेस के कथित गिरोह नेटवर्क से जुड़े लोगों का स्वागत नहीं किया जाएगा।
टीएमसी कार्यकर्ताओं के बारे में अपना रुख स्पष्ट करते हुए भट्टाचार्य ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के किसी भी वर्ग को ‘‘अच्छी तृणमूल कांग्रेस’’ या ‘‘बुरी तृणमूल कांग्रेस’’ के रूप में वर्गीकृत किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि कोई अच्छी तृणमूल कांग्रेस है या बुरी तृणमूल कांग्रेस है। तृणमूल कांग्रेस और भ्रष्टाचार एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों और कार्यकर्ताओं का एक वर्ग भ्रष्टाचार से अछूता रहा और उन्होंने चुनाव में भाजपा का समर्थन किया।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘ऐसे लोग हैं, जो तृणमूल का हिस्सा थे, लेकिन उस भ्रष्ट व्यवस्था से बाहर रहे। उनमें से कई ने हमें वोट दिया।’’
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों के भविष्य में भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल होने का निर्णय पार्टी सामूहिक रूप से लेगी, न कि कोई नेता व्यक्तिगत रूप से लेगा।
भट्टाचार्य ने कहा कि मुसलमानों को अपनी ‘‘अल्पसंख्यक मानसिकता’’ त्याग देनी चाहिए और खुद को सबसे पहले नागरिक के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के दो-तिहाई बहुमत ने यह साबित कर दिया है कि अल्पसंख्यक वोट पर निर्भर हुए बिना भी सरकारें बनाई जा सकती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुसलमानों में यह धारणा है कि वे अल्पसंख्यक हैं, इस धारणा को दूर करना होगा। भाजपा ने यह साबित कर दिया है कि वह एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारे बिना और अल्पसंख्यक वोट पर निर्भर हुए बिना दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में आ सकती है।’’
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि मुसलमान अल्पसंख्यक की तरह नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और भारत के नागरिक की तरह व्यवहार करें।’’
उन्होंने धार्मिक कट्टरता के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि यह न केवल देश के लिए, बल्कि स्वयं मुसलमानों के लिए भी खतरा है।
भाषा सुरभि दिलीप
दिलीप