झारखंड के माओवादियों से हिंसा त्यागकर विकास में शामिल होने का आग्रह है : डीजीपी

झारखंड के माओवादियों से हिंसा त्यागकर विकास में शामिल होने का आग्रह है : डीजीपी

झारखंड के माओवादियों से हिंसा त्यागकर विकास में शामिल होने का आग्रह है : डीजीपी
Modified Date: January 24, 2026 / 09:07 pm IST
Published Date: January 24, 2026 9:07 pm IST

चाईबासा, 24 जनवरी (भाषा) झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने शनिवार को माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने और राज्य की विकास पहल में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने मार्च तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

मिश्रा ने बृहस्पतिवार सुबह सारंडा जंगल में हुई गोलीबारी में सुरक्षा बलों द्वारा 17 माओवादियों को मार गिराए जाने की बड़ी सफलता के बाद पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा का दौरा किया। मारे गए माओवादियों में पतिराम मांझी उर्फ ​​अनल दा भी शामिल था, जिस पर कुल मिलाकर 2.35 करोड़ रुपये का इनाम था।

मिश्रा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, ‘‘यह बेहतर आकलन, समन्वय, योजना और क्रियान्वयन का परिणाम है। यह ऐतिहासिक है।’’

जंगल युद्ध में विशेषज्ञता रखने वाली केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोबरा इकाई और राज्य पुलिस के संयुक्त अभियान में मारे गए लोगों में पांच महिलाएं भी शामिल थीं।

इस अभियान में करीब 1,500 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। मिश्रा ने कहा, ‘‘मैं माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के मिशन में शामिल होने का आग्रह करती हूं। सारंडा को नक्सलवाद से मुक्त कराना मेरी प्राथमिकता है। हम मार्च तक राज्य से वामपंथी उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नक्सल प्रभाव से मुक्त कराए जा रहे क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए उत्सुक हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह शुरू हुए और शनिवार को समाप्त हुए तलाशी अभियान के दौरान चार एके-47, चार इंसास राइफल और तीन एसएलआर सहित हथियारों और गोला-बारूद का एक बड़ा जखीरा बरामद किया गया।

संवाददाता सम्मेलन में मौजूद सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह ने कहा, ‘‘झारखंड में करीब 65 माओवादी थे। मुठभेड़ के बाद अब 50 से भी कम बचे हैं। राज्य में माओवादियों के खिलाफ लड़ाई अपने अंतिम चरण में है। हमने आज एक बैठक की, जिसमें माओवादियों के खिलाफ लड़ाई को जल्द से जल्द खत्म करने की रणनीति पर चर्चा की गई।’’

उन्होंने कहा कि राज्य में अब केवल एक प्रमुख माओवादी मिसिर बेसरा ही बचा है।

अनल दा तीन मार्च, 2006 को बोकारो में सीआईएसएफ शिविर पर हुए हमले से जुड़ा था, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे और दो अन्य घायल हो गए थे। वह जून 2019 में सरायकेला-खरसावां जिले के कुकरू हाट में पांच सुरक्षाकर्मियों की हत्या और मई 2025 में ओडिशा में खनन के लिए रखे गए पांच टन विस्फोटक की लूट में भी शामिल था।

पुलिस ने बताया कि झारखंड ने अनल के सिर पर एक करोड़ रुपये का इनाम रखा था, जबकि ओडिशा ने 1.2 करोड़ रुपये और आतंकवाद रोधी एजेंसी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

झारखंड में कोल्हान, विशेषकर सारंडा, माओवादियों का अंतिम गढ़ माना जाता है।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


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