सार्वजनिक परीक्षा में अंक की जानकारी गोपनीय नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
सार्वजनिक परीक्षा में अंक की जानकारी गोपनीय नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
प्रयागराज, 10 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा कि सार्वजनिक परीक्षा में अंक की जानकारी गोपनीय नहीं होती और इसके लिए किसी तीसरे पक्ष की सहमति लेनी आवश्यक नहीं है, जिसके अंक की जानकारी आरटीआई आवेदक द्वारा मांगी गई है।
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने महाप्रबंधक, ‘डीजल लोकोमोटिव वर्क्स’ के जरिए केंद्र सरकार द्वारा दायर रिट याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की।
अदालत ने कहा, “अगर एक उम्मीदवार द्वारा प्राप्त अंक की जानकारी दूसरे उम्मीदवार द्वारा मांगी जाती है तो वह कोई गोपनीय निजी सूचना नहीं है, जिसके लिए सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा आठ के तहत तीसरे पक्ष की सहमति आवश्यक हो।”
अदालत ने कहा, “अगर एक बाहरी व्यक्ति यह सूचना मांगता है तो विभाग गोपनीयता का आधार ले सकता है। हालांकि, जहां तक उत्तर पुस्तिका की प्रतियों का प्रश्न है, इसमें परीक्षकों के हस्ताक्षर आदि हो सकते हैं, इसलिए उनके नाम आदि को उजागर करना उचित नहीं होगा।”
रेलवे ने वर्ष 2008 में विधि सहायक के पद के लिए परीक्षा आयोजित की थी।
संतोष कुमार नाम के एक उम्मीदवार ने स्वयं समेत तीन उम्मीदवारों को दिए गए अंकों के बारे में आरटीआई कानून के तहत जानकारी मांगी थी।
हालांकि उसे अंक उपलब्ध नहीं कराए गए, लेकिन किसी भी दिन उत्तर पुस्तिका देखने की अनुमति दे दी गई थी।
इस निर्णय के खिलाफ उसने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की, जिसने आवेदक को उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
अदालत ने 26 फरवरी को दिए आदेश में कहा कि जहां सूचना निजता पर आक्रमण ना करे और उसे जनहित में उजागर किया जा सकता है, तो उसे अवश्य उजागर किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि एक सार्वजनिक परीक्षा में अंक की सूचना देना एक उम्मीदवार की निजता पर हमला नहीं है और कोई जांच लंबित रहने पर ही ऐसी सूचना रोकी जा सकती है।
अदालत ने हालांकि, उत्तर पुस्तिका की प्रतियां उपलब्ध कराने के संबंध में कहा कि अधिकारी इन प्रतियों को उपलब्ध कराने को बाध्य नहीं हैं क्योंकि इससे विभिन्न अन्य सूचना प्रकट होगी जो सार्वजनिक नहीं हैं।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
जितेंद्र

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