एक वयस्क महिला के साथ विवाहित पुरुष का सहजीवन संबंध में रहना अपराध नहीं : इलाहाबाद उच्च न्यायालय
एक वयस्क महिला के साथ विवाहित पुरुष का सहजीवन संबंध में रहना अपराध नहीं : इलाहाबाद उच्च न्यायालय
प्रयागराज, 27 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी विवाहित पुरुष का एक वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से सहजीवन (लिव-इन) संबंध में रहना कानून के तहत अपराध नहीं है।
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक मामले में दो याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देते हुए की।
अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा, “यदि एक विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से सहजीवन संबंध में रह रहा है, तो यह कोई अपराध नहीं है। नैतिकता और कानून को अलग-अलग रखना होगा। यदि कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता, तो सामाजिक विचार और नैतिकता अदालत का मार्गदर्शन नहीं करेंगे।”
यह मामला उस समय अदालत के समक्ष आया, जब महिला की मां ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया कि उसकी 18 वर्षीय बेटी को उक्त व्यक्ति बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया है।
याचिका के अनुसार हालांकि महिला ने शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि वह वयस्क है और अपनी इच्छा से उक्त व्यक्ति के साथ सहजीवन संबंध में रह रही है।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके परिजन इस संबंध का विरोध कर रहे हैं और उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, जिससे झूठी शान की खातिर की जाने वाली हत्या (ऑनर किलिंग) की आशंका है। उसके अनुसार, इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई आठ अप्रैल को तय की।
उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
भाषा
सं, राजेंद्र रवि कांत

Facebook


