मध्यस्थता अब महानगर तक सीमित नहीं, प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ बहुत दूर तक पहुंच गई है: सीजेआई

मध्यस्थता अब महानगर तक सीमित नहीं, प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ बहुत दूर तक पहुंच गई है: सीजेआई

मध्यस्थता अब महानगर तक सीमित नहीं, प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ बहुत दूर तक पहुंच गई है: सीजेआई
Modified Date: June 5, 2025 / 01:21 am IST
Published Date: June 5, 2025 1:21 am IST

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई ने कहा है कि मध्यस्थता अब महानगरीय केंद्रों तक सीमित नहीं रह गई है और प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ, यह बहुत दूर तक पहुंच गई है।

सीजेआई ने लंदन में एलसीआईए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता संगोष्ठी में कहा कि आभासी सुनवाई, स्थानीयकृत केस प्रबंधन और संस्थानों द्वारा ‘आउटरीच’ पहल भौगोलिक विभाजन को पाटने में मदद करेगी।

आने वाले वर्षों में विकसित होने वाले वैश्विक मध्यस्थता परिदृश्य में भारत की भूमिका के सवाल पर न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘भारत की सामान्य कानूनी जड़ों और मध्यस्थता के पक्ष में फैसलों को देखते हुए, यह कहना सुरक्षित है कि भारत वैश्विक मध्यस्थता परिवार में ‘हस्तक्षेप करने वाली महत्वपूर्ण भूमिका में है।’

उन्होंने कहा कि चुनौती न केवल पहुंच का विस्तार करने में है, बल्कि जहां भी पहुंच है, प्रक्रिया की गुणवत्ता और शुचिता सुनिश्चित करने में है।

एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब सार्वजनिक धन दांव पर लगा हो, तो मध्यस्थों और अदालतों दोनों को न केवल तटस्थ निर्णायक के रूप में, बल्कि सार्वजनिक विश्वास के संरक्षक के रूप में कार्य करना चाहिए।

भाषा सुरेश अमित

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