मेघालय: गारो हिल्स क्षेत्र में गैर-जनजातीय समुदाय के लोगों के जमीन खरीदने पर प्रतिबंध
मेघालय: गारो हिल्स क्षेत्र में गैर-जनजातीय समुदाय के लोगों के जमीन खरीदने पर प्रतिबंध
शिलांग, छह मार्च (भाषा) मेघालय में गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद ने छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए एक अधिसूचना जारी कर गारो हिल्स जिलों में गैर-जनजातीय समुदाय के लोगों द्वारा भूमि की खरीद या दावा करने पर रोक लगा दी। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
हालांकि, गैर-जनजातीय समुदाय के लोगों के कानूनी स्वामित्व वाली भूमि की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
परिषद ने कहा कि छठी अनुसूची के तहत जारी यह निर्देश क्षेत्र में आदिवासी समुदायों की भूमि, प्रथागत अधिकारों और पारंपरिक स्वामित्व की रक्षा, संरक्षण एवं सुरक्षा करने तथा ऐसी भूमि को गैर-जनजातीय समुदाय के लोगों को बेचने से रोकने के एकमात्र उद्देश्य से जारी किया गया है।
पूर्वोत्तर के चार राज्यों असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में छठी अनुसूची स्वायत्त जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशिष्ट है।
छठी अनुसूची कुछ जनजातीय क्षेत्रों के स्वायत्त प्रशासन का प्रावधान करती है। बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार गैर-जनजातीय समुदाय से संबंधित कोई भी व्यक्ति गारो हिल्स जिले में किसी भी भूमि पर किसी भी प्रकार का अधिकार, स्वामित्व या हित प्राप्त नहीं कर सकता, न ही उसे खरीद सकता है, न ही अधिकार जमा सकता है, न विरासत में प्राप्त कर सकता है, न पट्टे पर ले सकता है, न गिरवी रख सकता है, न बेच सकता है और न ही उसपर दावा कर सकता है।
अधिसूचना में बताया गया कि किसी गैर-जनजातीय व्यक्ति के पक्ष में भूमि का कोई भी हस्तांतरण, बंदोबस्ती, दाखिल खारिज, पंजीकरण या मान्यता वैध नहीं मानी जाएगी और किसी भी प्राधिकरण द्वारा उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
परिषद ने बेनामी लेन-देन या ऐसी व्यवस्थाओं पर भी रोक लगा दी, जिनमें किसी आदिवासी व्यक्ति के नाम पर किसी गैर-आदिवासी व्यक्ति के लाभ के लिए भूमि रखी जाती है।
परिषद ने कहा कि ऐसी भूमि स्वामित्व वाली संपत्तियां अमान्य और अप्रवर्तनीय मानी जाएंगी।
यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
परिषद ने पिछले महीने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें 10 अप्रैल को होने वाले गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद के चुनावों में गैर-आदिवासी व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई थी।
भाषा जितेंद्र पवनेश
पवनेश

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