मेघालय: बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना के ‘के9 योद्धाओं’ और रोबोटिक कुत्तों की धूम
मेघालय: बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना के ‘के9 योद्धाओं’ और रोबोटिक कुत्तों की धूम
शिलांग, 26 मई (भाषा) भारतीय सेना के युद्ध-प्रशिक्षित कुत्तों ने अभ्यास ‘प्रगति 2026’ में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे यह पता चलता है कि आधुनिक सैन्य अभियानों में खोजी कुत्तों की इकाइयां किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
मित्र देशों की सेनाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए, भारतीय सेना के ‘के9 योद्धाओं’ ने विस्फोटक का पता लगाने, खोजबीन और हस्तक्षेप कार्यों में अपनी विशेषज्ञता का शानदार प्रदर्शन किया।
अधिकारियों के अनुसार, इसने उच्च जोखिम वाले युद्ध परिदृश्यों और बहुराष्ट्रीय अभियानगत स्थितियों में उनकी अहमियत को रेखांकित किया है।
अभ्यास में ‘बेल्जियन मैलिनोइस’ नस्ल के हमलावर कुत्ते ‘एलन’, स्वदेशी नस्ल ‘रामपुर हाउंड’ के खोजी कुत्ते ‘विक्टर’ और विस्फोटकों का पता लगाने में प्रशिक्षित लैब्राडोर नस्ल के ‘डेओ’ के प्रदर्शन से सभी प्रभावित नजर आए।
सेना द्वारा यहां जारी एक बयान के अनुसार, प्रत्येक कुत्ते ने विशेष अभियानगत क्षमताओं का प्रदर्शन किया, जो भारतीय सेना की ‘के9’ टीम के कौशल, अनुशासन और मिशन की तत्परता को दर्शाता है।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास का एक मुख्य आकर्षण स्वदेशी ‘रामपुर हाउंड’ नस्ल की भागीदारी थी, जिसका प्रतिनिधित्व ‘विक्टर’ ने किया, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत अभियानगत भूमिकाओं में देशी नस्लों को शामिल करने पर सेना की बढ़ती इच्छा को दर्शाता है।
अधिकारियों ने बताया कि जलवायु के अनुकूल ढलने की क्षमता, सहनशक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाने वाली ये स्वदेशी नस्लें, रेगिस्तान से लेकर ग्लेशियर तक, विभिन्न अभियानगत स्थितियों में प्रभावी साबित हो रही हैं।
इस अभ्यास में रोबोटिक कुत्तों को भी शामिल किया गया, जो भविष्य के युद्ध अभियानों में पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के साथ उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण को दर्शाता है।
अधिकारियों ने कहा कि रोबोटिक प्लेटफॉर्म और प्रशिक्षित सैन्य कुत्तों के इस संयुक्त प्रदर्शन ने प्रौद्योगिकी और सहज बोध के एक साथ मिलकर काम करने की तस्वीर पेश की, जो अभियानगत प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों के अनुसार, अभ्यास ‘प्रगति 2026’ में 12 देशों के 400 से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सामरिक अभ्यास और संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से आपसी तालमेल तथा युद्ध की तैयारी को और मजबूत करना है।
भाषा नेत्रपाल माधव
माधव

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