सदन में कामकाज से जुड़े दस्तावेज को ही उद्धृत कर सकते हैं सदस्य: विशेषज्ञ
सदन में कामकाज से जुड़े दस्तावेज को ही उद्धृत कर सकते हैं सदस्य: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद में पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित ‘संस्मरण’ से उद्धरण देने से जुड़े विवाद के बीच संसदीय प्रक्रियाओं के एक विशेषज्ञ ने मंगलवार को कहा कि नियम 349 सदस्यों को सदन के कामकाज से संबंधित मामलों के अलावा किसी भी किताब, अख़बार या पत्र को पढ़ने से रोकता है।
हालांकि, इस नियम में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वह दस्तावेज़ प्रकाशित है या अप्रकाशित।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अध्यक्ष ओम बिरला के बीच उस वक्त गतिरोध की स्थिति देखने को मिली, जब अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता को पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरण से उद्धरण देने की अनुमति नहीं दी और सदन के नियम का हवाला दिया।
नरवणे के इस संस्मरण में भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव से जुड़े प्रकरण का उल्लेख है।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए राहुल गांधी को इस पुस्तक के कुछ अंश उद्धृत करने से रोका।
लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. आचारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “यदि दस्तावेज सदन के कामकाज से जुड़ा हो, तो कोई सदस्य इनसे संदर्भ दे सकता है।”
उन्होंने कहा कि नियम “नकारात्मक भाषा” में लिखा गया है, लेकिन उसका “सकारात्मक अर्थ” भी है, जो सदस्यों को सदन के काम से संबंधित दस्तावेज़ों से उद्धरण देने की अनुमति भी देता है।
उनका कहना है कि सोमवार को सदन के समक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी, जिसमें विदेश नीति या अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संदर्भ हो सकता था।
आचारी ने इस बात को रेखांकित किया कि भले ही यह नियम में स्पष्ट न हो, लेकिन अतीत में अध्यक्षों ने यह व्यवस्था दी है कि जो सदस्य सदन में कुछ उद्धृत करना चाहता है, उन्हें उस दस्तावेज को प्रमाणित करना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘सदस्य को यह कहना होगा कि वह उस पर कायम है और उद्धृत दस्तावेज़ की सामग्री को सत्यापित करता है।’’
आचारी के अनुसार, एक बार दस्तावेज़ प्रमाणित हो जाने पर अध्यक्ष सदस्य को उसे उद्धृत करने की अनुमति देते हैं। उसके बाद सरकार की ज़िम्मेदारी होती है कि वह उसका जवाब दे और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सदन को केवल सच ही बताया जाना चाहिए और जो सदस्य किसी गलत या फर्जी दस्तावेज़ से उद्धरण देता है, उसकी ज़िम्मेदारी उसी की होती है।
संविधान विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित सदस्य के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है।
राहुल गांधी ने जब अप्रकाशित किताब से उद्धरण देना शुरू किया, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि जो सामग्री प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसे सदन में कैसे उद्धृत किया जा सकता है।
भाषा हक हक वैभव
वैभव

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