विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के राजदूत को तलब कर हमले में भारतीय नाविक की मौत पर विरोध जताया
विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के राजदूत को तलब कर हमले में भारतीय नाविक की मौत पर विरोध जताया
नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) भारत ने सोमवार को यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब कर पिछले हफ्ते काला सागर में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने राजदूत को इस घटना पर नयी दिल्ली की गंभीर चिंता से अवगत कराया और वाणिज्यिक जहाज पर हुए ऐसे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।
खबरों के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के दौरान ‘एमवी ओमोर्फी’ जहाज यूक्रेन के ड्रोन हमलों की चपेट में आ गया।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘आज, भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को विदेश मंत्रालय तलब किया गया। यह कदम वाणिज्यिक जहाज ‘एमवी ओमोर्फी’ पर हुए हमले के सिलसिले में उठाया गया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत हो गई थी।’’
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘उसने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई है और वाणिज्यिक पोत पर हुए ऐसे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। साथ ही, समुद्री नौवहन की सुरक्षा, नौवहन की आजादी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इनके बुरे असर को भी रेखांकित किया है। ’’
बयान के मुताबिक, राजदूत से ‘‘यूक्रेन के अधिकारियों तक वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने को लेकर भारत की गंभीर चिंताएं पहुंचाने को कहा गया और इस बात को दोहराया गया कि ऐसे कृत्य, जिनसे निर्दोष आम नागरिकों और नाविकों की जान को खतरा होता है, स्वीकार्य नहीं हैं तथा इनसे बचना चाहिए।’’
भारत ने गत मंगलवार को रूसी दूतावास के प्रभारी को तलब किया था और यूक्रेन के तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर मॉस्को द्वारा किए गए हमले की ‘‘स्पष्ट तौर पर निंदा’’ की। इस हमले में चार भारतीय नाविकों सहित 10 लोगों की मौत हो गई थी।
नयी दिल्ली स्थित यूक्रेनी दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा कि वह उन भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति अपनी ‘‘गहरी संवेदना’’ व्यक्त करता है, जिनकी जान काला सागर में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण चली गई।
बयान के मुताबिक, उक्त घटना के बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को शोक संदेश भेजा।
यूक्रेन के दूतावास ने उम्मीद जताई कि उसके देश के विदेश मंत्री के प्रस्ताव पर सिबिहा और जयशंकर जल्द ही काला सागर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर बातचीत करेंगे।
दूतावास ने काला सागर और अजोव सागर में सुरक्षा की नाजुक स्थिति के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया और संकेत दिया कि कीव केवल आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहा है।
इसमें कहा गया, ‘‘भारत में यूक्रेन के दूतावास का मानना है कि काला सागर और अजोव सागर में रूस की आक्रामक कार्रवाइयों से आम नागरिकों के आवागमन को जो खतरा और जोखिम है, उसे इलाके में सुरक्षा हालात से जुड़ी किसी भी चेतावनी पर तुरंत प्रतिक्रिया देकर कम किया जा सकता है।’’
बयान के मुताबिक, युद्ध के दौरान, यूक्रेन ने लगातार अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों – जिनमें भारत के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं – को काला सागर में रूस की गतिविधियों से आम नागरिकों के आवागमन पर बढ़ते खतरों के बारे में आगाह किया है।
यूक्रेन के दूतावास ने कहा कि उसके देश ने अपने सहयोगियों को उन उपायों के बारे में भी जानकारी दी है जो वे ‘‘सैन्य साजो सामान की आपूर्ति को रोकने और रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को जारी रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सामरिक रास्तों को बाधित करने’’ के लिए कर रहा है।
दूतावास ने कहा, ‘‘यूक्रेन, भारत सरकार के नौवहन महानिदेशालय (डीजीएमए) के 23 जुलाई के परिपत्र 41 पर भी संज्ञान लेता है। इस परिपत्र में भारतीय जहाजों और विदेशी ध्वज वाले उन जहाजों के लिए समुद्री सुरक्षा परामर्श जारी किया गया जिनपर भारतीय नाविक सवार हैं और जो काला सागर से गुजर रहे हैं या वहां काम कर रहे हैं।’’
इसने कहा कि यूक्रेन का ‘‘दृढ़ विश्वास है कि सक्षम प्राधिकारियों द्वारा समय पर और एहतियाती कार्रवाई किया जाना बहुत आवश्यक है। यह कार्रवाई उन इलाकों में समुद्री यात्रियों की सुरक्षा, असैन्य जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जरूरी है, जहां ऐसे खतरे साफ तौर पर पहचाने गए हैं।’’
यूक्रेनी दूतावास ने अपने बयान में कहा, ‘‘समुद्री सुरक्षा बहाल करने का एकमात्र स्थायी तरीका यह है कि रूसी संघ पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाया जाए ताकि वह असैन्य जहाजों पर अपने हमले बंद करे।’’
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल

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