केरल में फर्जी मतदान के आरोपों को लेकर मामूली प्रदर्शन हुए

केरल में फर्जी मतदान के आरोपों को लेकर मामूली प्रदर्शन हुए

केरल में फर्जी मतदान के आरोपों को लेकर मामूली प्रदर्शन हुए
Modified Date: April 9, 2026 / 05:12 pm IST
Published Date: April 9, 2026 5:12 pm IST

तिरुवनंतपुरम, नौ अप्रैल (भाषा) केरल में विधानसभा चुनाव के लिये मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन फर्जी मतदान के आरोपों को लेकर बृहस्पतिवार को कुछ केंद्रों पर प्रदर्शन की खबरें भी आईं।

त्रिशूर जिले के मनलूर में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) उम्मीदवार टी.एन. प्रतापन के पहुंचने के बाद कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच मामूली झड़प हो गई।

पुलिस के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रतापन के साथ आए लोगों को बूथ परिसर में प्रवेश करने से रोका, जिसके कारण झड़प हुई।

त्रिशूर जिले के ही वडक्कनचेरी में, सजीव नामक एक मतदाता अपना वोट नहीं डाल सका क्योंकि चुनाव अधिकारियों ने उसे सूचित किया कि उसका वोट पहले ही डाक मतपत्र के रूप में दर्ज हो चुका है।

इससे भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके कारण पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

चुनाव अधिकारियों ने उन्हें ‘टेंडर वोट’ डालने की अनुमति देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया।

यदि कोई मतदाता मतदान केंद्र पर पहुंचता है और पाता है कि उसके नाम पर पहले ही किसी और ने मतदान कर दिया है, तो वह पीठासीन अधिकारी को सूचित कर सकता है। वैध दस्तावेजों से अपनी पहचान साबित करने के बाद, मतदाता को मतदान मशीन के बजाय अपना मतपत्र से ‘टेंडर वोट’ डालने की अनुमति दी जाती है।

बाद में भाजपा उम्मीदवार टी.एस. उल्लास बाबू बूथ पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।

कोझिकोड जिले के कुट्टियाडी में भी इसी तरह की एक घटना हुई, जहां एक महिला को मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया गया क्योंकि यह पाया गया कि उसका वोट पहले ही डाक मतपत्र के रूप में डाला जा चुका था।

प्रभावित मतदाताओं को बाद में ‘टेंडर वोट’ डालने की अनुमति दी गई।

कासरगोड के उडुमा में एक कांग्रेस एजेंट को मतदान केंद्र के अंदर “स्मार्ट चश्मे” का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया।

भाषा प्रशांत देवेंद्र

देवेंद्र


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