अहमदाबाद/ नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) आम आदमी पार्टी ने अपने विधायक चैतर वसावा को अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने और सात साल कारावास की सजा सुनाए जाने के खिलाफ तीन चरणों में पूरे गुजरात में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
पार्टी ने आरोप लगाया है कि वसावा के खिलाफ दर्ज किया गया मामला राजनीति से प्रेरित था और इसका मकसद विपक्ष की आवाज को दबाना था।
आप के गुजरात मामलों के प्रभारी गोपाल राय ने दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)पर देश में विपक्षी दलों को दबाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
राय ने दावा किया कि डेडियापाडा के विधायक वसावा को सजा सुनाए जाने के साथ गुजरात में ऐसी कार्रवाइयों का एक ‘‘नया अध्याय’’ शुरू हुआ है। उन्होंने इसे एक ‘झूठा मामला’ बताया क्योंकि आदिवासी नेता ने भाजपा के दबाव में झुकने से इनकार कर दिया था।
यहां की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को आप विधायक वसावा, उनकी पत्नी और सात अन्य लोगों को नवंबर 2023 में वन अधिकारियों के साथ मारपीट और जबरन वसूली के मामले में सात साल कारावास की सजा सुनाई।
अदालत के फैसले के बाद गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष पूर्णेश मोदी ने ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के प्रावधानों का हवाला देते हुए वसावा की सदस्यता समाप्त कर दी और कहा कि उनकी सीट अब खाली मानी जाएगी।
राय ने मामले में वसावा की पत्नी को दोषी ठहराए जाने का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि हाल ही में हुए प्रसव के बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने इस कदम को भाजपा शासन में ‘‘क्रूरता की पराकाष्ठा’ करार दिया।
राय के अनुसार, आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ने की वजह और आप द्वारा नर्मदा ज़िला पंचायत चुनाव में बहुमत हासिल करने की वजह से वसावा को निशाना बनाया गया।
दिल्ली के पूर्व मंत्री ने कहा, ‘‘गुजरात की जनता निश्चित रूप से इसका जवाब देगी।’’
उन्होंने कहा कि विरोध अभियान तीन चरणों में चलाया जाएगा, जिसकी शुरुआत 26 जून को सभी ज़िला मुख्यालयों पर आयोजित होने वाले मोर्चों से होगी।
राय ने कहा, ‘‘28 जून को सभी 182 विधानसभा क्षेत्रों में इसी तरह के मार्च आयोजित किए जाएंगे और उसके बाद 30 जून को स्थानीय निकाय के वार्डों सहित करीब 1,000 जगहों पर प्रदर्शन किए जाएंगे।’’
आप नेता ने कहा कि यह आंदोलन अब सिर्फ वसावा या आदिवासी समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुजरात में उनके शब्दों में ‘दमन’ के खिलाफ एक व्यापक संघर्ष का रूप लेगा।
इस बीच, आप के राज्य संगठन महासचिव मनोज सोरठिया और राज्य संगठन सचिव निरंजन वसावा ने डेडियापाडा में पार्टी कार्यकर्ताओं और मीडिया को संबोधित किया और उस न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए जिसके कारण सजा सुनाई गई।
सोरठिया ने आरोप लगाया कि वसावा और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था। उन्होंने दावा किया कि जहां आपराधिक मुकदमों के निस्तारण में अक्सर कई साल लग जाते हैं, वहीं इस मामले की कार्यवाही असामान्य रूप से तेज़ी से आगे बढ़ी, जिससे इस प्रक्रिया को लेकर चिंताएं पैदा हुईं।
सोरठिया ने आरोप लगाया कि गवाहों के बयान वीडियो कांफ्रेंस के जरिए दर्ज किए गए और मुकदमे के दौरान आरोपी के अधिकारों को सीमित करने की कोशिशें की गईं।
भाषा धीरज माधव
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