जिला अदालतों का मौद्रिक अधिकार: बार प्रतिनिधियों को उच्च न्यायालय की समिति से मिलने को कहा गया
जिला अदालतों का मौद्रिक अधिकार: बार प्रतिनिधियों को उच्च न्यायालय की समिति से मिलने को कहा गया
नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) सभी जिला अदालत बार एसोसिएशन की समन्वय समिति के प्रतिनिधियों से 30 जनवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की उस समिति के साथ बैठक में हिस्सा लेने के लिए कहा गया है, जो जिला अदालतों के मौद्रिक क्षेत्राधिकार को बढ़ाने के मुद्दे पर विचार कर रही है।
समन्वय समिति ने पिछले साल मई में बढ़ती “मुद्रास्फीति” का हवाला देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से राष्ट्रीय राजधानी की सभी जिला अदालतों की मौद्रिक सीमा को मौजूदा दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर न्यूनतम 20 करोड़ रुपये करने का आग्रह किया था।
उसी महीने समन्वय समिति के अध्यक्ष नागेंद्र कुमार, प्रवक्ता नीरज और नयी दिल्ली बार एसोसिएशन (एनडीबीए) के सचिव तरुण राणा सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने मेघवाल से मुलाकात कर मौद्रिक क्षेत्राधिकार को बढ़ाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय अधिनियम में संशोधन करने का अनुरोध किया था।
नवंबर 2025 में समन्वय समिति और एनडीबीए ने पटियाला हाउस जिला अदालत परिसर में अधिवक्ताओं की एक बैठक का आयोजन किया था, जिसमें न्याय में देरी को रोकने और लंबित मामलों की संख्या में कमी लाने के लिए मौद्रिक क्षेत्राधिकार में संशोधन की मांग की गई थी।
इस साल 24 जनवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने समन्वय समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि मामले पर विचार करने के लिए गठित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की समिति ने न्यायाधीशों के साथ बातचीत के लिए समन्वय समिति के तीन या चार प्रतिनिधियों को बुलाने का निर्देश दिया है।
पत्र में कहा गया है, “इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया दिल्ली के सभी जिला अदालत बार एसोसिएशन की समन्वय समिति के तीन या चार प्रतिनिधियों को शुक्रवार, 30 जनवरी को (उच्च न्यायालय की) समिति के न्यायाधीशों के साथ बातचीत के लिए भेजें…।”
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश


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