वायनाड (केरल), 31 जुलाई (भाषा) वायनाड की एक अदालत ने 2003 में मुथंगा आंदोलन के दौरान पुलिस आरक्षी के वी विनोद की हत्या के मामले में शुक्रवार को आदिवासी नेता एम.जी. गीतानंदन समेत 56 आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि हत्या के प्रयास के संबंधित मामले में उन्हें और तीन अन्य लोगों को दोषी ठहराया।
वायनाड जिला और सत्र न्यायाधीश अय्यूब खान ई ने विनोद हत्याकांड में दूसरे आरोपी अशोकन को दोषी ठहराया, जबकि अन्य सभी जीवित आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि चूंकि मुकदमे की कार्यवाही के दौरान ही अशोकन की मौत हो गई थी, इसलिए उसे कोई सज़ा नहीं सुनाई गई।
इसी घटना के दौरान पुलिस अधिकारी अब्दुल सलाम और वन अधिकारी शशिधरन की हत्या की कोशिश के एक संबंधित मामले में, अदालत ने गीतानंदन, बिनु, रमेशन और अनिलकुमार को दोषी पाया तथा उन्हें पांच साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई।
हालांकि अलग-अलग धाराओं के तहत उन्हें कुल 19 साल की सज़ा सुनाई गई है, लेकिन अदालत ने निर्देश दिया कि सजाएं एक साथ चलेंगी तथा उन्हें पांच साल तक जेल में रहना होगा।
अदालत ने पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवज़ा देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने व्यवस्था दी कि विनोद के परिवार को सात लाख रुपये, अब्दुल सलाम को पांच लाख रुपये और शशिधरन को दो लाख रुपये दिए जाएं।
कन्नूर निवासी विनोद की मौत 19 फरवरी 2003 को उस पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई थी, जिसमें जमीन के अधिकार की मांग को लेकर मुथंगा वन्यजीव अभयारण्य में जमीन पर कब्ज़ा करने वाले आदिवासी प्रदर्शनकारियों को हटाया जा रहा था।
इस मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, जिसके बाद इसे अपराध शाखा और बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, थकाराप्पाडी के गौदानवयाल में विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने विनोद और वन अधिकारी शशिधरन को एक अस्थायी शेड में बंधक बना लिया था। वहां आदिवासी नेताओं– सी.के. जानू और एम.जी. गीतानंदन के नेतृत्व में ज़मीन पर कब्ज़े का 47 दिन से चल रहा विरोध-प्रदर्शन अपने चरम पर पहुंच गया था।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि बंधक रखे जाने के दौरान विनोद की हत्या कर दी गई।
भाषा
राजकुमार वैभव
वैभव