राजस्थान के जैविक उद्यानों में नाहरगढ़ सबसे आगे, 14 बाघ-बाघिन और शावकों का बसेरा

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राजस्थान के जैविक उद्यानों में नाहरगढ़ सबसे आगे, 14 बाघ-बाघिन और शावकों का बसेरा

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 05:58 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 05:58 PM IST

(अविनाश बाकोलिया)

जयपुर, 28 जुलाई (भाषा) जयपुर का नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क बाघों के संरक्षण के लिहाज से राजस्थान का प्रमुख प्राणी उद्यान बनकर उभरा है। राज्य के चार प्रमुख पार्कों में रहने वाले कुल 18 बाघों में से 14 बाघ, बाघिन और उनके बच्चे इसी प्राणी उद्यान में हैं।

अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) के अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि यदि प्रदेश के जैविक उद्यानों की तस्वीर देखें तो जयपुर का नाहरगढ़ जैविक उद्यान सबसे अलग नजर आता है। नाहरगढ़ जैविक उद्यान में 14 बाघ-बाघिन और शावक हैं। यहां सफेद बाघ, नवजात शावक और सफल प्रजनन कार्यक्रम न केवल वन्यजीव संरक्षण की कहानी कहते हैं, बल्कि दय उद्यान को पर्यटकों के आकर्षण का भी प्रमुख केंद्र बनाते हैं।

वन विभाग के अनुसार, नाहरगढ़ जैविक उद्यान में 4 बाघ, 4 बाघिन और छह शावक मौजूद हैं।

प्रदेश में जयपुर के नाहरगढ़, उदयपुर के सज्जनगढ़, जोधपुर के माचिया और कोटा के अभेड़ा जैविक उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों का संरक्षण किया जा रहा है।

सहायक वन संरक्षक जितेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान प्रशासन के अनुसार यहां बाघ शिवाजी, बाघिन रानी और उनके पांच शावक विजय, सूर्या, शौर्य, वृंदा, अम्बे और एक बाघिन भक्ति का शावक हैं। शावकों की उम्र अभी काफी कम होने के कारण उन्हें पर्यटकों के लिए प्रदर्शित नहीं किया जा रहा है। फिलहाल उन्हें सुरक्षित वातावरण में विकसित होने के लिए रखा गया है।

उन्होंने बताया कि टाइगर सफारी में बाघ गुलाब, सफेद बाघ भीम, बाघिन भक्ति, चमेली और स्कंदी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। इनके अलावा रणथम्भौर बाघ अभयारण्य से रेस्क्यू कर लाया गया बाघ रणवीर भी यहां रखा गया है। उसकी विशेष देखभाल के चलते उसे भी फिलहाल पर्यटकों की नजरों से दूर रखा गया है।

शेखावत ने बताया कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान की एक और खासियत यहां मौजूद सफेद बाघ भीम है। सामान्य बाघों की तुलना में सफेद बाघ काफी दुर्लभ माने जाते हैं और इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यही वजह है कि टाइगर सफारी का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।

अधिकारियों के अनुसार उद्यान में इस समय सबसे कम उम्र का शावक केवल तीन माह का है जबकि सबसे वरिष्ठ बाघ शिवाजी की उम्र लगभग नौ वर्ष है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जैविक उद्यान में अलग-अलग आयु वर्ग के बाघों का होना स्वस्थ संरक्षण प्रणाली का संकेत माना जाता है। इससे प्राकृतिक व्यवहार, प्रजनन और आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने में मदद मिलती है।

यदि प्रदेश के अन्य जैविक उद्यानों पर नजर डालें तो उदयपुर के सज्जनगढ़ जैविक उद्यान में एक बाघिन, कोटा के अभेड़ा जैविक उद्यान में एक बाघ तथा जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान में एक बाघ और एक बाघिन हैं। यानी नाहरगढ़ को छोड़ दें तो बाकी तीनों उद्यानों में कुल दो बाघ और दो बाघिन हैं।

विभाग के अधिकारियों का मानना है कि, वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ नाहरगढ़ टाइगर सफारी पर्यटन के लिहाज से भी लगातार लोकप्रिय हो रही है। जयपुर आने वाले देश-विदेश के पर्यटक ऐतिहासिक धरोहरों के साथ यहां प्राकृतिक वातावरण में बाघों को देखने के रोमांच का भी अनुभव करते हैं।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2024 से जून 2026 के बीच 24,882 पर्यटकों ने नाहरगढ़ टाइगर सफारी का भ्रमण किया। इस अवधि में टिकट और अन्य मदों से 5 करोड़ 17 लाख 6 हजार 400 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। यह दर्शाता है कि वन्यजीव पर्यटन संरक्षण और आर्थिक गतिविधियों, दोनों को मजबूती दे रहा है।

वन विभाग का मानना है कि सफारी की सुविधाओं और पर्यटक प्रबंधन में लगातार सुधार से आने वाले वर्षों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है। इससे संरक्षण गतिविधियों को भी अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक उद्यान केवल वन्यजीवों के प्रदर्शन का स्थान नहीं हैं, बल्कि संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण, प्रजनन, उपचार और जन-जागरूकता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इससे यहां आने वाले विद्यार्थी, शोधार्थी और पर्यटक वन्यजीवों के व्यवहार, उनके संरक्षण और जैव विविधता के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

भाषा बाकोलिया

नरेश

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