नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने सोमवार को कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महज लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का कानून नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता में बदलाव लाने का एक प्रयास है जिसने महिलाओं को वर्षों तक निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखा है।
रहाटकर ने यहां विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून संख्यात्मक प्रतिनिधित्व से भी आगे जाता है तथा शासन और नीति निर्माण में महिलाओं की अधिक भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
रहाटकर ने कहा कि यह कानून भारत के लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाकर उसे मजबूत करता है और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम महज लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता में बदलाव लाने का प्रयास है जिसने वर्षों से महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखा है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो भारत के लोकतंत्र को संख्या बल से कहीं आगे, अधिक संवेदनशीलता की ओर अग्रसर करता है।’’
रहाटकर ने कहा कि भारत की परंपरा में हमेशा से महिलाओं को नेतृत्व के पदों पर स्थान दिया गया है और उन्होंने रानी दुर्गावती, रानी अब्बक्का, अहिल्याबाई होलकर, माता जिजाऊ और सावित्रीबाई फुले जैसी ऐतिहासिक हस्तियों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण की प्रक्रिया शाश्वत है – संघर्ष से सशक्तीकरण तक और सशक्तीकरण से नेतृत्व तक तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इसे एक नयी दिशा और गति मिल रही है।
भाषा अमित सुभाष
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