जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर एक जून को राष्ट्रीय कार्यशाला
जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर एक जून को राष्ट्रीय कार्यशाला
नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) नीति निर्माता, शोधकर्ता, नवप्रवर्तक, स्टार्टअप और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ एक जून को जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा लेंगे और सतत भूजल प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और वर्षा जल संचयन पर विचार-विमर्श करेंगे।
जल शक्ति मंत्रालय के तहत आयोजित की जा रही इस कार्यशाला में जल सुरक्षा को मजबूत करने और टिकाऊ जल प्रथाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों पर विचार-विमर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे।
मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) किस प्रकार जल सुरक्षा के लिए व्यावहारिक और विस्तार योग्य समाधानों को बढ़ावा दे रहा है। देश में वास्तविक दुनिया की जल चुनौतियों का समाधान करने वाले सफल अध्ययन और नवाचार, और शोधन व उपचार, सिंचाई प्रबंधन और टिकाऊ जल प्रथाओं जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक हस्तक्षेप शामिल हैं।
इन चर्चाओं में सामुदायिक नेतृत्व और संस्था-संचालित मॉडलों को साझा करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा जिन्हें जमीनी स्तर पर दोहराया जा सकता है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, राज्य मंत्रियों जितेंद्र सिंह, राज भूषण चौधरी और वी सोमन्ना की उपस्थिति में डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) में राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे।
तकनीकी सत्रों में बड़ी नदियों में रेत खनन के विभिन्न प्रभावों का आकलन करने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन रिमोट सेंसिंग और ड्रोन सर्वेक्षणों के उपयोग पर प्रकाश डाला जाएगा।
भूटान में मांगदेछू जलविद्युत परियोजना के मॉडल अध्ययनों पर भी एक सत्र आयोजित किया जाएगा, ताकि बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
शहरी क्षेत्रों में जलभंडार मानचित्रण पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया जाएगा, ताकि सतत भूजल प्रबंधन और जल सुरक्षा को बढ़ावा मिल सके।
मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यशाला विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और हितधारकों के लिए देश में जल नवाचार के भविष्य पर चर्चा करने के वास्ते एक मंच तैयार करेगी।
भाषा तान्या मनीषा
मनीषा

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