नौवहन उपग्रह एनवीएस-3 प्रक्षेपण के लिए तैयार : जितेंद्र सिंह

नौवहन उपग्रह एनवीएस-3 प्रक्षेपण के लिए तैयार : जितेंद्र सिंह

नौवहन उपग्रह एनवीएस-3 प्रक्षेपण के लिए तैयार : जितेंद्र सिंह
Modified Date: August 5, 2026 / 09:11 pm IST
Published Date: August 5, 2026 9:11 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) सरकार ने बुधवार को संसद को बताया कि भारत की क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (नाविक) के लिए एनवीएस-3 उपग्रह प्रक्षेपण की खातिर तैयार है। इसके बाद, एनवीएस-4 और एनवीएस-5 का प्रक्षेपण किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि इन उपग्रहों के प्रक्षेपण के बाद सात उपग्रहों वाले ‘नाविक’ के बुनियादी समूह को पूरा करने के लिए एक और उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना है।

हालांकि, सिंह ने इन प्रक्षेपणों की समयसीमा का उल्लेख नहीं किया।

इस वर्ष मार्च में भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली-1एफ (आईआरएनएसएस-एफ) में लगी अंतिम परमाणु घड़ी (एटॉमिक क्लॉक) ने भी काम करना बंद कर दिया था, जिससे भारत की उपग्रह आधारित प्रणाली नाविक (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) लगभग निष्क्रिय हो गई थी।

वर्तमान में केवल आईआरएनएसएस-1बी, आईआरएनएसएस-1एल और एनवीएस-01 ही सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हैं। नाविक प्रणाली के सुचारु संचालन के लिए कम से कम चार उपग्रहों में परमाणु घड़ियों का चालू हालत में होना आवश्यक है।

नाविक के लिए पहली पीढ़ी के उपग्रह, जिन्हें भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) श्रृंखला के नाम से जाना जाता है, वर्ष 2013 से 2018 के बीच प्रक्षेपित किए गए थे।

हालांकि, कुछ ही समय बाद इस उपग्रह समूह में समस्याएं आने लगीं और आईआरएनएसएस श्रृंखला के कई उपग्रहों में लगी परमाणु घड़ियां बार-बार खराब होने लगीं।

एनवीएस श्रृंखला नाविक के लिए दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों की श्रृंखला है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वर्ष 2023 में एनवीएस-1 को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में स्थापित किया था, लेकिन वर्ष 2025 में एनवीएस-2 का प्रक्षेपण विफल रहा। इसके कारण एनवीएस-3, एनवीएस-4 और एनवीएस-5 के प्रक्षेपण में देरी हुई।

एनवीएस-2 की विफलता का उल्लेख करते हुए सिंह ने अपने उत्तर में कहा, ‘‘एनवीएस-2 में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारणों का समाधान करने के लिए सभी आवश्यक सुधारात्मक उपाय शामिल करने के बाद एनवीएस-3 अब प्रक्षेपण के लिए तैयार है।’’

मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि इसरो ने इस वर्ष मानसून के दौरान 28 जुलाई तक, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) को बाढ़ से जलमग्न क्षेत्रों के 33 मानचित्र और संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

ऐसी जानकारी की मदद से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विकास गतिविधियों की योजना बनाने या उन्हें विनियमित करने के साथ-साथ बचाव एवं राहत कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश


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