एनसीईआरटी की पुस्तक में भ्रष्टाचार और लंबित मुकदमों को न्यायिक प्रणाली की चुनौतियां बताया गया

एनसीईआरटी की पुस्तक में भ्रष्टाचार और लंबित मुकदमों को न्यायिक प्रणाली की चुनौतियां बताया गया

एनसीईआरटी की पुस्तक में भ्रष्टाचार और लंबित मुकदमों को न्यायिक प्रणाली की चुनौतियां बताया गया
Modified Date: February 24, 2026 / 02:32 pm IST
Published Date: February 24, 2026 2:32 pm IST

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) आठवीं कक्षा के लिए एनसीईआरटी की सामाजिक विज्ञान की नयी पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या और न्यायाधीशों की पर्याप्त कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली ‘‘चुनौतियों’’ में शामिल हैं।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नयी किताब के ‘‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’’ नामक खंड में कहा गया है कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं जो न केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है, बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है।

‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक वाले संशोधित अध्याय में न्यायालयों के पदानुक्रम और न्याय तक पहुंच की व्याख्या करने से आगे बढ़कर न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान तक का जिक्र है।

पाठ्यपुस्तक के पहले के संस्करणों में मुख्य रूप से न्यायालयों की संरचना और भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

अध्याय में लिखा है, ‘‘…न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। गरीबों और वंचितों के लिए इससे न्याय तक पहुंच का मुद्दा और भी गंभीर हो सकता है। इसलिए न्यायिक प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य और केंद्र स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी का उपयोग भी शामिल है और जहां भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आएं, उनके खिलाफ त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।’’

पुस्तक के अनुसार, उच्चतम न्यायालय में लंबित मुकदमों की अनुमानित संख्या 81,000 है, उच्च न्यायालयों में 62.40 लाख और जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं।

पुस्तक में न्यायपालिका की आंतरिक जवाबदेही प्रणालियों को रेखांकित किया गया है और शिकायतें प्राप्त करने की स्थापित प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, जो केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) के माध्यम से संचालित होती है।

पुस्तक में लिखा है कि 2017 से 2021 के बीच इस तंत्र के जरिए 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।

पाठ्यपुस्तक में भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाओं का जनता के भरोसे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पुस्तक में उन्हें उद्धृत करते हुए कहा गया है, ‘‘हालांकि, इस विश्वास को पुनर्स्थापित करने का मार्ग इन मुद्दों के समाधान के लिए त्वरित, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई में निहित है…… पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्वपूर्ण गुण हैं।”

भाषा गोला वैभव

वैभव


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