कानूनी क्षेत्र में एआई के लिए नैतिक दिशानिर्देशों और मजबूत डेटा सुरक्षा की आवश्यकता: विशेषज्ञ

कानूनी क्षेत्र में एआई के लिए नैतिक दिशानिर्देशों और मजबूत डेटा सुरक्षा की आवश्यकता: विशेषज्ञ

कानूनी क्षेत्र में एआई के लिए नैतिक दिशानिर्देशों और मजबूत डेटा सुरक्षा की आवश्यकता: विशेषज्ञ
Modified Date: February 21, 2026 / 05:16 pm IST
Published Date: February 21, 2026 5:16 pm IST

(मनीष राज)

नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) विधि विशेषज्ञों का कहना है कि कानूनी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते एकीकरण ने महत्वपूर्ण अवसरों के साथ-साथ व्यापक नैतिक और नियामक चुनौतियां भी पैदा की हैं।

भारत एआई के क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े सम्मेलन ‘एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ की मेजबानी कर रहा है, ताकि इस नयी तकनीक को बढ़ावा दिया जा सके।

खेतान एंड कंपनी के वरिष्ठ साझेदार अजय भार्गव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि एआई कानूनी दक्षताओं को बढ़ाएगा, लेकिन यह अभी भी एक सहायक उपकरण है जो एक अनुभवी वकील के दृष्टिकोण, नैतिक तर्कशक्ति या रणनीतिक निर्णय क्षमता की बराबरी नहीं कर सकता।

भार्गव ने कुछ जोखिमों की ओर इशारा करते हुए कहा कि एआई द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट पर अत्यधिक निर्भरता संभावित त्रुटियों के कारण समस्याग्रस्त हो सकती है। इसलिए, एआई द्वारा तैयार किए गए सभी सामग्री का गहन मानवीय सत्यापन आवश्यक है।

उन्होंने कहा, ‘‘कानूनी क्षेत्र में एआई के एकीकरण से व्यापक चुनौतियां भी सामने आती हैं, जो वकीलों द्वारा इसके उपयोग को नियंत्रित करने वाले स्पष्ट नैतिक दिशानिर्देशों के साथ-साथ मजबूत डेटा संरक्षण कानूनों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।’’

अधिवक्ता तरुण राणा ने कहा कि एआई मुख्य रूप से एक सहायक उपकरण है, जो वकीलों को शोध करने और कानूनी मामलों को समझने में मदद करता है।

राणा ने कहा, ‘‘कानूनी शोध के लिए एआई उपकरण मददगार हो सकते हैं, लेकिन पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं हैं। यह प्रासंगिक कानूनी मामलों और उनसे संबंधित प्रावधानों को तेज़ी से खोज सकता है, जिससे खोज में लगने वाला लंबा समय बच जाता है, लेकिन कभी-कभी यह निरस्त, पुराने या गलत मामलों के संदर्भ दे सकता है। यह किसी फैसले के संदर्भ को भी गलत समझ सकता है।’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई पर आंख बंद करके भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है, और इसकी कड़ी मानवीय जांच होनी चाहिए।

कानूनी फर्म द्वारा एआई के इस्तेमाल के बारे में बात करते हुए, भार्गव ने कहा कि एआई को एक सहायक उपकरण के रूप में वर्तमान में दस्तावेज़ समीक्षा, अनुसंधान और केस प्रबंधन जैसे डेटा-प्रधान कार्यों के लिए उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘खेतान एंड कंपनी में, हम सहायक मसौदा तैयार करने और अनुसंधान के लिए अपने स्वामित्व वाले एआई उपकरणों का उपयोग करते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय और रणनीतिक निर्णय पूरी तरह से हमारे वकीलों के पास रहता है, जो जटिल भारतीय कानूनी प्रणाली और बाजार संदर्भ की समझ रखते हैं।’

ट्रस्ट लीगल के प्रबंध साझेदार अधिवक्ता सुधीर मिश्रा ने देशभर में कानूनी पेशेवरों द्वारा एआई के उपयोग में मौजूद क्षेत्रीय बाधाओं की ओर इशारा किया।

मिश्रा ने कहा, “कानूनी क्षेत्र में एआई की भूमिका काफी सीमित है और शहरी क्षेत्रों या महानगरों तक ही सीमित है। यह निश्चित रूप से निर्णय लेने का उपकरण नहीं है। हम अनुबंधों/ड्र्राफ्ट के लिए एआई का इस्तेमाल नहीं करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय पहले ही एआई से संबंधित मामलों के संदर्भों से होने वाली समस्याओं का जिक्र कर चुका है, और इस संबंध में बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है।”

मिश्रा ने कहा, ‘एआई से रोजगार के अवसर कम नहीं होंगे। न्याय तक सभी की पहुंच में मौजूद अंतर को पाटने के लिए हमें सैकड़ों मेहनती वकीलों की जरूरत है।’

कानूनी क्षेत्र में एआई के लिए एक विशिष्ट नियामक ढांचे की आवश्यकता के संबंध में राणा ने कहा कि यह अनिवार्य है। राणा ने वकीलों द्वारा प्रामाणिक निर्णय संग्रहों से उचित सत्यापन के बिना अदालतों के समक्ष फर्जी उद्धरण प्रस्तुत किए जाने के मामलों का भी जिक्र किया।

भाषा आशीष रंजन

रंजन

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