मणिपुर और त्रिपुरा की पूर्व रियासतों के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर अध्ययन की जरूरत: केंद्रीय मंत्री

मणिपुर और त्रिपुरा की पूर्व रियासतों के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर अध्ययन की जरूरत: केंद्रीय मंत्री

मणिपुर और त्रिपुरा की पूर्व रियासतों के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर अध्ययन की जरूरत: केंद्रीय मंत्री
Modified Date: December 16, 2023 / 07:47 pm IST
Published Date: December 16, 2023 7:47 pm IST

अगरतला, 16 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने शनिवार को कहा कि त्रिपुरा और मणिपुर की पूर्व रियासतों के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर अध्ययन की जरूरत है।

त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में मणिपुरी लोग लंबे समय से त्रिपुरा में रह रहे हैं और राज्य में मणिपुरी भाषा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘‘रियासत’ मणिपुर के (तत्कालीन) शासक वंश का सदस्य होने के नाते मैं दो पूर्व रियासतों की संस्कृति और परंपरा पर एक सहयोगात्मक अध्ययन का विचार रखना चाहूंगा। यह कार्य त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय और मणिपुर विश्वविद्यालय द्वारा किया जा सकता है।’’

उन्होंने कहा कि दोनों पूर्व रियासतों के बीच वैवाहिक और सांस्कृतिक संबंध थे।

सिंह ने कहा, ‘‘बड़ी संख्या में मणिपुरी लोग लंबे समय से यहां रह रहे हैं। मणिपुरी भाषा को बढ़ावा देने का प्रयास होना चाहिए ताकि छात्र दो या तीन भाषाएं सीख सकें।’’

उन्होंने कहा कि त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय पूर्वोत्तर के उन कुछ विश्वविद्यालयों में से एक है जिन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू किया है। उन्होंने कहा कि इसने पिछले दो शैक्षणिक वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए हुए आवेदन की दूसरी सबसे बड़ी संख्या दर्ज की है।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में अपनाया गया एनईपी 2020 छात्रों के लिए न्यायसंगत और उच्च श्रेणी की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय लोकाचार में गहराई से निहित है।’’

एनईपी 2020 की सराहना करते हुए राज्यपाल इंद्रसेन रेड्डी नल्लू ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने ‘विकसित भारत’ के सपने को हकीकत में बदलने के लिए युवाओं पर भरोसा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के करीब 40 फीसदी लोग ‘कोकबोरोक’ बोलते हैं, लेकिन उनके पास इसकी लिपि नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक में एक संस्थान पुरानी भाषाओं पर काम कर रहा है। कोकबोरोक की लिपि अपनाने के लिए इसकी मदद ली जा सकती है।’’

भाषा सुरभि संतोष

संतोष


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