नीट विरोध प्रदर्शन: दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस लाठीचार्ज संबंधी याचिका खारिज की
नीट विरोध प्रदर्शन: दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस लाठीचार्ज संबंधी याचिका खारिज की
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े प्रदर्शनों में शामिल विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज के आरोप से इनकार करने के दिल्ली पुलिस के दावे को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि पुलिस के इस दावे के विपरीत मीडिया में खबरें प्रकाशित हुई थीं।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि एक नागरिक और मीडिया पेशेवर के नाते उसे सच्चाई जानने का अधिकार है, जो जवाबदेही तय करने के लिए आवश्यक है। उसने अदालत से दिल्ली पुलिस को इस मुद्दे पर दिए गए उसके अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि जनहित याचिका के तहत ऐसे मामलों पर सुनवाई का प्रावधान नहीं है। पीठ ने याचिकाकर्ता नितिन नरेश से कहा कि वह यह बताएं कि किस कानून के तहत उन्हें अपने अभ्यावेदन पर निर्णय की मांग करने का अधिकार है।
अदालत ने कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता को किसी विवाद या कानूनी/संवैधानिक अधिकार के हनन को साबित करना होता है।
पीठ ने कहा, ‘‘समाचार पत्र पढ़कर आपके दिमाग में आने वाली हर चीज जनहित याचिका नहीं बन जाती। जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे बड़े-बड़े शब्दों का इस्तेमाल बिना किसी ठोस आधार के नहीं किया जाना चाहिए।’’
पीठ ने कहा, ‘‘आपकी याचिका क्या है? दिल्ली पुलिस ने एक बयान जारी किया। मीडिया द्वारा उस बयान का खंडन किया गया और आप हमसे जांच का निर्देश देने के लिए कह रहे हैं?’’
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के केंद्र जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था
अपनी मांगों को लेकर हजारों प्रदर्शनकारी 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के लिए जंतर-मंतर पर जुटे।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, भीड़ बढ़ने के बाद जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।
इसके बाद हुई झड़पों में पुलिस के कई जवान और प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से कॉजपा की अन्य मांगों को माने जाने के बाद एक महीने से अधिक समय तक चला यह आंदोलन समाप्त हो गया।
भाषा खारी माधव
माधव

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