नीट प्रश्नपत्र लीक : न्यायालय में याचिका दायर कर एनटीए के पुनर्गठन या पुनर्स्थापन का अनुरोध

नीट प्रश्नपत्र लीक : न्यायालय में याचिका दायर कर एनटीए के पुनर्गठन या पुनर्स्थापन का अनुरोध

नीट प्रश्नपत्र लीक : न्यायालय में याचिका दायर कर एनटीए के पुनर्गठन या पुनर्स्थापन का अनुरोध
Modified Date: May 14, 2026 / 03:39 pm IST
Published Date: May 14, 2026 3:39 pm IST

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका में एनटीए का पुनर्गठन या प्रतिस्थापन करने और नीट-यूजी आयोजित करने के वास्ते एक मजबूत एवं स्वायत्त प्रणाली बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता ने अपने अनुरोध के साथ बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के कारण 22.7 लाख से अधिक छात्रों के मौलिक अधिकारों पर ‘‘प्रत्यक्ष हमले’’ का हवाला दिया है।

‘द फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) ने अधिवक्ता तन्वी दुबे के जरिये दाखिल अर्जी में अनुरोध किया है कि जब तक पुनर्परीक्षा की देखरेख के लिए औपचारिक रूप से एक नए निकाय का गठन नहीं हो जाता, तब तक उच्चाधिकार प्राप्त एक निगरानी समिति नियुक्त की जाए।

याचिका में कहा गया कि इस समिति में उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष नियुक्त किया जाए, साथ ही एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक शामिल किए जाएं ताकि भविष्य में पेपर लीक होने की कोई घटना न हो।

चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) आयोजित की थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच 12 मई यह परीक्षा रद्द कर दी गई। इस पूरे प्रकरण की अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की जा रही है।

एफएआईएमए द्वारा दाखिल याचिका में एनटीए, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और सीबीआई को पक्षकार बनाया गया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘वर्तमान रिट याचिका में एनटीए द्वारा नीट-यूजी आयोजित करने में बार-बार, व्यवस्थित और अनर्थकारी विफलता के खिलाफ इस माननीय न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया जाता है।’’

याचिका के मुताबिक, राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने खुलासा किया कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर प्रसारित ‘संभावित प्रश्नपत्रों’ में 120 ऐसे प्रश्न थे जो नीट-यूजी 2026 परीक्षा के वास्तविक जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान अनुभागों में पूछे गए प्रश्नों के समान थे।

इसमें कहा गया कि एनटीए द्वारा 5जी जैमर, जीपीएस ट्रैकिंग और एआई-निगरानी वाले कैमरों सहित उच्च-तकनीकी सुरक्षा उपायों का उपयोग करने के दावों के बावजूद, ये उपाय ‘केवल कागजों पर’ ही प्रतीत होते हैं।

याचिका में कहा गया, ‘‘पूर्व में प्रश्नपत्र लीक के मामलों के बाद की गई सिफारिश के अनुसार, प्रश्न पत्रों को ‘डिजिटल रूप से लॉक’ करने और ‘कंप्यूटर आधारित परीक्षा’ (सीबीटी) मॉडल में परिवर्तन को सीधे अनिवार्य किया जाए, ताकि भौतिक रूप से प्रश्नों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को समाप्त किया जा सके।’’

याचिकाकर्ता ने इसके अलावा, सीबीआई को यह निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया कि वह प्रश्नपत्र लीक की जांच के संबंध में चार सप्ताह के भीतर उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करे, जिसमें पहचाने गए नेटवर्क, की गई गिरफ्तारियां, आरोपी व्यक्तियों और अभियोजन में हुई प्रगति की जानकारी हो।’’

याचिका में कहा गया है कि ‘‘अनियमितताओं का पारदर्शी ढंग से पता लगाने’’ के लिए एनटीए से ‘‘नीट-यूजी 2026 के परिणाम केंद्रवार प्रकाशित करने’’ को कहा जाए।

इसमें कहा गया, ‘‘नीट-यूजी भारत में स्नातक चिकित्सा प्रवेश के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जो 22.7 लाख से अधिक छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। प्रणालीगत विफलता की यह बार-बार होने वाली घटना अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता और जीवन/आजीविका के अधिकार की मूलभूत गारंटी पर सीधा हमला है।’’

याचिका में कहा गया कि एनटीए द्वारा परीक्षा आयोजित करने के लिए इस्तेमाल की जा रही मौजूदा प्रणाली में उचित सुरक्षा उपायों का अभाव है। गत वर्षों में बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के बावजूद, अधिकारी परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ‘‘आवश्यक बदलाव लागू करने में विफल’’ रहे हैं।

इसमें कहा गया, ‘‘वे अब भी प्रश्न पत्रों को भौतिक रूप से छापने और परिवहन के लिए निजी कूरियर का उपयोग करने जैसे जोखिम भरे, पुराने जमाने के तरीकों पर निर्भर हैं, जिससे पेपर लीक होने की आशंका बढ़ जाती है।’’

याचिकाकर्ता ने रेखांकित किया कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है।

याचिका में 2024 के प्रश्नपत्र लीक की घटना से तुलना करते हुए कहा गया कि एनटीए अतीत की गलतियों से सबक लेने में विफल रही है।

इसमें प्रश्नपत्रों को रखने के सुरक्षित स्थानों तक अनधिकृत पहुंच और ई-रिक्शा एवं निजी कूरियर के माध्यम से ‘अत्यंत संवेदनशील’ दस्तावेजों के परिवहन के संबंध में पूर्व न्यायिक टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है।

एफएआईएमए ने दलील दी कि परीक्षा रद्द होने से 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में आगे के कदमों को लेकर चिंता पैदा हो गई है, जिसमें नयी परीक्षा तिथि, प्रवेश पत्र, परीक्षा केंद्र और काउंसलिंग की समयसीमा संबंधी चिंताएं शामिल हैं।

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल


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