वनों को बनाए रखने वाले तंत्र की अनदेखी भावी पीढ़ियों के भविष्य को पंगु बना देगी: प्रधान न्यायाधीश

वनों को बनाए रखने वाले तंत्र की अनदेखी भावी पीढ़ियों के भविष्य को पंगु बना देगी: प्रधान न्यायाधीश

वनों को बनाए रखने वाले तंत्र की अनदेखी भावी पीढ़ियों के भविष्य को पंगु बना देगी: प्रधान न्यायाधीश
Modified Date: September 5, 2026 / 10:39 pm IST
Published Date: September 5, 2026 10:39 pm IST

नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि पूरी तरह से संरक्षित वन जिसमें कोई विकास कार्य न हुआ हो, उससे किसी का भला नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह जो देश वनों को बनाए रखने वाले तंत्र की परवाह किए बिना विकास करता है, वह अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को पंगु बना देगा।

‘ब्रिक्स’ के सदस्य देशों और साझेदार देशों के प्रधान न्यायाधीशों, सर्वोच्च न्यायालयों के अध्यक्षों तथा वरिष्ठ न्यायिक नेताओं की भागीदारी वाले ‘ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच’ के दूसरे दिन ‘पारिस्थितिकी शासन में न्यायिक नेतृत्व और टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों को आगे बढ़ाना’ के विषय पर केंद्रित सत्र में सभा को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालतों के पास विकास की गति को टिकाऊपन की लय के साथ संतुलित करने की शक्ति है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक मिसालों को साझा करके, एक-दूसरे की सफलताओं और कठिनाइयों से सीखकर तथा ऐसा न्यायशास्त्र विकसित करके, जो दृढ़ होने के साथ-साथ संवेदनशील भी हो, वैश्विक नैतिकता की नींव रखी जा सकती है। इसमें कानून मानव की आकांक्षाओं और पर्यावरणीय संतुलन के बीच एक सेतु का काम करेगा।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘देवियों और सज्जनों, किसी देश में पूरी तरह संरक्षित वन अगर अविकसित रह जाए तो वह किसी के लिए लाभकारी नहीं होगा। इसके विपरीत, जो देश अपने विकास में वन को बनाए रखने वाले तंत्र की अनदेखी करेगा, वह अपनी भावी पीढ़ियों के भविष्य को पंगु बना देगा।’’

‘ब्रिक्स’ उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है।

संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका के सामने विकास और पर्यावरण के बीच उचित संतुलन कायम करने की चुनौती है।

भाषा संतोष माधव

माधव


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