Teacher Day in UP: यूपी के 81 शिक्षकों को मिला अध्यापक पुरस्कार, सीएम योगी ने किया सम्मानित, कहा- शिक्षा में तकनीक के साथ संस्कार भी जरूरी

यूपी के 81 शिक्षकों को मिला अध्यापक पुरस्कार, सीएम योगी ने किया सम्मानित, 81 Teachers From UP Received The Teachers' Award

Teacher Day in UP: यूपी के 81 शिक्षकों को मिला अध्यापक पुरस्कार, सीएम योगी ने किया सम्मानित, कहा- शिक्षा में तकनीक के साथ संस्कार भी जरूरी
Modified Date: September 5, 2026 / 10:05 pm IST
Published Date: September 5, 2026 10:03 pm IST

गोरखपुर/लखनऊः Teacher Day in UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए महान शिक्षाविद्, दार्शनिक तथा भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत ने प्राचीन काल से शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया है। कोई भी राष्ट्र तभी सशक्त और समर्थ हो सकता है, जब उस राष्ट्र की भावनाओं के अनुरूप शिक्षा और संस्कार बचपन से ही युवा पीढ़ी को प्राप्त हों। बच्चों को संस्कारवान, अनुशासित तथा राष्ट्र के प्रति जवाबदेह बनाने का कार्य शिक्षक ही कर सकते हैं। बच्चे और युवा के वन में परिवर्तन का वाहक शिक्षक बन सकते हैं। इसलिए शिक्षकों के प्रति सम्मान का यह समारोह अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

Teacher Day in UP: मुख्यमंत्री आज जनपद गोरखपुर में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित ‘राज्य अध्यापक सम्मान समारोह’ में समर्पण, नवाचार तथा शिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले बेसिक शिक्षा विभाग एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के 81 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार-2025 से सम्मानित करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं की गोदभराई, बच्चों का अन्नप्राशन तथा बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग तथा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग से सम्बन्धित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा विभाग से सम्बन्धित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान का उपासक रहा है। यहां ज्ञान की विशिष्ट उपासना की परम्परा रही है। भारत में ज्ञान की इस विरासत को गुरु-शिष्य परम्परा के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। अलग-अलग कालखण्डों में विकसित हुई इन परम्पराओं को आज भी सामाजिक अथवा धार्मिक परम्पराओं के रूप में मान्यता प्राप्त है। शिक्षक ज्ञान की इस विशिष्ट परम्परा को आधुनिक स्वरूप प्रदान करते हुए भारत के भविष्य को गढ़ने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान की अधिष्टात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा तथा भगवान वेदव्यास के जन्मदिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में आयोजित करना इसी विशिष्ट ज्ञान परम्परा का हिस्सा है। स्वतंत्र भारत में आधुनिक शिक्षा को अपनी परम्परागत ज्ञान परम्परा से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के भविष्य को गढ़ने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी क्रम में डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों द्वारा अपने उत्तरदायित्वों के ईमानदारीपूर्वक निर्वहन के सम्मानस्वरूप आज बेसिक शिक्षा के 61 शिक्षकों तथा माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार और माध्यमिक शिक्षा के 05 अन्य शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस प्रकार बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के कुल 81 शिक्षक सम्मानित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अवगत कराया गया कि मंच पर 10 शिक्षकों को आमंत्रित किया जाएगा, तो उन्होंने सभी 81 शिक्षकों को मंच पर आमंत्रित करने का निर्णय लिया। मेरठ, सहारनपुर, हमीरपुर, महोबा, झांसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षकों को मंच पर सम्मानित किया जाना चाहिए। सम्मानित शिक्षकों की उपस्थिति और उत्साह हमें इस समारोह को नई प्रेरणा प्रदान कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार एजुकेशन को एक्सक्लूसिव और अधिक रिसोर्सफुल तथा शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ट्रांसपेरेन्ट बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। विगत 09 वर्षों में शिक्षकों ने अपनी आंखों से उत्तर प्रदेश को बदलते हुए देखा है। है। 2017 से पूर्व प्रदेश में कर्फ्यू लगता था तथा दंगा होता था। कल जन्माष्टमी का पर्व प्रदेश के सभी 1,586 थानों, देव मन्दिरों, 75 जनपदों की पुलिस लाइन्स तथा सभी जिलों में हर घर तथा गांव मे शान्तिपूर्वक आयोजित किया गया। पहले दंगा, कर्फ्यू और अराजकता के वातावरण में कोई स्कूल चल सके, ऐसी कोई कल्पना नहीं कर सकता था। पिछले 09 वर्षों में हम सबने देखा है कि आज प्रदेश में सुरक्षा का संकट नहीं है। अब कोई दंगा या उपद्रव नहीं कर सकता। अब प्रदेश के शिक्षकों पर कोई प्रश्न चिन्ह खड़ा नहीं कर सकता। वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में दंगे होते थे। शिक्षा व्यवस्था में नकल होती थी, तब पूरी शिक्षा व्यवस्था बदनाम होती थी। प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का संकट था। भारत की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य कटघरे में खड़ा होता था। प्रदेश के युवा तथा शिक्षक बाहर जाते थे, तो उन्हें संशय और शक की निगाहों से देखा जाता था। आज प्रदेश में पहचान एवं सुरक्षा का संकट नहीं है और त्योहारों से पहले उपद्रव की स्थिति नहीं बनती। आज उत्तर प्रदेश के युवा और शिक्षक गर्व के साथ अपनी पहचान बताते हैं। शिक्षक इस आमूलचूल परिवर्तन के प्रारम्भिक कड़ी, नींव तथा महत्वपूर्ण वाहक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करना आसान है किन्तु जमीनी धरातल पर कार्य करना कठिन है। प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाने का कार्य किया है। शिक्षा में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यह देश व प्रदेश का भविष्य बनाएगी। विद्यालयों के प्रति हमारा सम्मान पुनः वापस लौटा है। इस गौरव व विश्वास को बनाए रखना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। आज दुनिया बदल रही है। एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नालॉ दुनिया में आमूलचूल परिवर्तन ला रही है। इसलिए विद्यालयों में रोबोटिक्स, 3-डी प्रिन्टिंग और आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस जैसी एडवांस टेक्नोलॉ की ट्रेनिंग के लिए भी तैयारी की जा रही है। विद्यार्थियों में 21वीं सदी के स्किल्स, डिजिटल लिटरेसी और इनोवेशन का एप्रोच विकसित करना आवश्यक है। तकनीक के आने से शिक्षक का स्थान कोई नहीं ले सकता। मशीन उत्तर दे सकती है, लेकिन मशीन प्रश्न करना नहीं सिखाती। प्रश्न पूछने की आदत बच्चे में शिक्षक ही विकसित कर सकता है। आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस किसी जानकारी को कुछ ही क्षणों में उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार नहीं दे सकती। संस्कार शिक्षक ही देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज शिक्षक को केवल काम बताना नहीं है, बल्कि स्वाभाविक भाव के साथ बच्चों के भविष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में मजबूती से कार्य करना है। शिक्षक का दायित्व है कि वह बच्चों को बताए कि कैसे सोचें, वन में अनुशासन का महत्व क्या है, समस्या के बारे में कैसे सोचें और उसके समाधान तक कैसे पहुंचें। तकनीक का उपयोग कैसे और किस सीमा तक किया जाना चाहिए, यह समझाने की जिम्मेदारी भी शिक्षक की है। शिक्षक के हाथ में केवल चॉक और किताब नहीं है। शिक्षक के हाथ में उत्तर प्रदेश का भी भविष्य है और देश का भविष्य भी। आज जिस बच्चे को शिक्षक पढ़ा रहे हैं, वही कल शिक्षक, चिकित्सक, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक, इंनियर और देश का नेतृत्वकर्ता बनेगा। जैसा संस्कार और अनुशासन शिक्षक देंगे, उसी रूप में वह शिक्षक को स्मरण करेगा। शिक्षक को स्वतःस्फूर्त भाव से छात्रों के भविष्य को आगे बढ़ाने हेतु कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक का संकल्प होना चाहिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। सरकार का दायित्व है कि प्रत्येक शिक्षक को सम्मान मिले और प्रत्येक विद्यालय सुरक्षित एवं संसाधनयुक्त हो। शिक्षा में तकनीक आए, लेकिन संस्कार पीछे न छूटें। हमें ऐसा उत्तर प्रदेश बनाना है, जहां गरीब का बच्चा भी सपना देखने की सामर्थ्य रखता हो, श्रमिक की बेटी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके और गांव का बच्चा भी तकनीक से जुड़ने की सामर्थ्य रखता हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने शिक्षा को कभी व्यापार नहीं माना। गुरुकुल में शिक्षा पूरी होने के बाद शिष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार गुरु दक्षिणा और गुरु उसे आगे बढ़ने का आशीर्वाद एवं नई प्रेरणा देता था। गुरु के लिए सबसे बड़ी दक्षिणा यही होती थी कि उसका शिष्य योग्य और संस्कारित बने। इसी परम्परा ने भारत को दुनिया में ज्ञान की आराधना की भूमि के रूप में प्रस्तुत किया। महर्षि वेदव्यास से लेकर आचार्य चाणक्य तक भारत की ज्ञान परम्परा अत्यन्त व्यापक रही है। आचार्य चाणक्य ने अर्थशास्त्र का विशिष्ट ज्ञान दिया और अपने ज्ञान के माध्यम से चंद्रगुप्त जैसे विजेता सम्राट का निर्माण किया। आयुर्वेद की विशिष्ट ज्ञान परम्परा में भगवान धन्वंतरि की जन्मस्थली भी उत्तर प्रदेश है। चरक और सुश्रुत ने चिकित्सा विज्ञान की नींव मजबूत की। सुश्रुत दुनिया के पहले सर्जन थे। गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी नारियों ने भारत की विशिष्ट ज्ञान की परम्परा को आगे बढ़ाया। गणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट तथा ज्योतिष शास्त्र एवं खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भारत की प्रतिभा का परिचय इसी आचार्य परम्परा ने दुनिया को कराया। भारत में शिक्षा को सदैव अनुसाशन से जोड़कर देखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने तथा आमूलचूल परिवर्तन लाने की दृष्टि से एक ‘टर्निंग प्वाइंट’ आया। सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में जड़ता और ठहराव को तोड़कर भविष्य के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर फोकस किया। प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन के लिए सरकार ने पूरी शक्ति के साथ कार्य किया। ट्रिपल टी ‘टीचर, टैलेन्ट एण्ड ट्रांसफॉर्मेशन’ को एक साथ जोड़कर कार्य किया गया। इसमें शिक्षक का सम्मान, विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यालयों में पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता शामिल है। वर्ष 2017 से पूर्व बच्चों को अक्षर तथा अंकों का ज्ञान नहीं था, ऐसे बच्चों को गणित और विज्ञान सिखाना सम्भव नहीं था। वर्ष 2017 से पूर्व विद्यालय नकल के अड्डे बन गए थे। दूसरे राज्यों के विद्यार्थी यहां पास होने आते थे। प्रदेश सरकार ने इस पर अंकुश लगाकर ऐसे नकल के केन्द्रां को परीक्षा में केन्द्र नहीं बनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से जिन संसाधनों का अभाव शिक्षक समुदाय महसूस करता था, उन्हें विद्यालयों में उपलब्ध कराने का कार्य किया गया। शिक्षामित्रों का मानदेय वर्ष 2017 में मात्र 3,000 रुपये था, जो आज 18,000 रुपये है। अनुदेशकों का मानदेय अब 17,000 रुपये हो गया है। साथ ही, उन्हें 05 लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई है। दुर्घटना की स्थिति में सामाजिक सुरक्षा की गारण्टी भी उपलब्ध कराई गई है। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों की संख्या लगभग 15 लाख है। इन सभी को 05 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का कार्य किया गया है। पहली बार सामाजिक सुरक्षा की गारण्टी भी दी गई है, ताकि दुर्घटना के समय शिक्षक या उसका परिवार अकेला महसूस न करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक का सम्मान केवल मानदेय बढ़ाने का विषय नहीं है। गांव के बच्चे के भविष्य के साथ खड़े होने वाले शिक्षक का स्वयं सम्मान होना चाहिए। इसी दृष्टि से राज्य अध्यापक पुरस्कार की राशि, जो पहले 10,000 रुपये थी, उसे बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है। सर्विस से जुड़े मामलों में ट्रांसपेरेन्सी और टाइमबाउण्ड रेजोल्यूशन के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पोर्टल भी विकसित किया गया है। शिक्षक की समस्या अब फाइलों में कैद नहीं होगी। टाइमबाउण्ड व्यवस्था के माध्यम से समस्या का समाधान होगा। शिक्षक की समस्या का समाधान जितनी ते से होगा, उतनी ही ते से शिक्षक अपने विद्यालय और बच्चों के नवाचार के लिए शिक्षा में शोध हेतु अपना समय लगा पाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद में आमूलचूल परिवर्तन का प्रयास हुआ है और यह कार्य लगातार जारी है। पी0एम0 विद्यालय, सीएम कम्पोजिट विद्यालय, ऑपरेशन कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार तथा निपुण भारत अभियान के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा में परिवर्तन किया गया है। माध्यमिक शिक्षा में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि 50 से 150 वर्ष पुराने पुराने जर्जर भवनों के स्थान पर नए भवनों के लिए उपलब्ध कराई गई। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 2,100 से अधिक विद्यालयों के भवन अच्छे दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का मॉडल आज पूरा देश देख रहा है। इस परिवर्तन को पूरा देश महसूस कर रहा है। इसलिए हमने तय किया है कि शिक्षा का यह मॉडल ते से आगे बढ़ेगा। हम पहले चरण में हर जनपद में 02-02 सी0एम0 कम्पोजिट विद्यालय दे रहे हैं। प्रयास है कि इसे तहसील स्तर पर लेकर जाएं। अटल आवासीय विद्यालय की तर्ज पर अटल आवासीय डे स्कूल के रूप में यह विद्यालय चलें। इसमें पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चे एक इन्टीग्रेटेड कैम्पस में पढ़ेंगे। यह शिक्षा की गुणवत्ता का एक अद्भुत मॉडल होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लीन एण्ड ग्रीन स्कूल बनाने की दिशा में हमने प्रयास किया था। प्रसन्नता है कि इस दिशा में किये गये प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 12 विद्यालयों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। तकनीक का प्रयोग गांव और शहर के बीच के अन्तर को समाप्त करने के लिए किया जा रहा है। आज विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट, पेयजल की व्यवस्था और पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। प्रदेश में 32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15,000 से अधिक विद्यालयों में आई0सी0टी0 लैब, 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी तथा 2,61,000 से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। 385 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब कार्य कर रही हैं। मॉडर्न टेक्नोलॉ की शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। 18 विद्यालयों में टाटा और यशकावा जैसे औद्योगिक समूहों के माध्यम से ड्रीम लैब तैयार कराई गई हैं। 5,500 से अधिक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा छह से आठवीं तक इंनियरिंग, एनर्, एनवायरनमेन्ट, एग्रीकल्चर एण्ड हेल्थ जैसे ट्रेड्स में बच्चों का कौशल विकास किया जा रहा है। इसके अलावा, संस्कृत पढ़ने वाले कक्षा-06 से आचार्य तक के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गयी है। संस्कृत विद्यालय तथा महाविद्यालयों को प्रोजेक्ट अलंकार के साथ जोड़ते हुए सुविधा सम्पन्न बनाया जा जा रहा है। साथ ही, 86 संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को नवीन मान्यता प्रदान की गयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां स्मार्ट क्लास पहुंची है, वहां शहर और गांव का भेद समाप्त हुआ है। जहां डिजिटल लाइब्रेरी पहुंची है, वहां गरीब और अमीर का भेद समाप्त हुआ है। शिक्षा के इस भेदभाव को दूर करने के लिए तकनीक सबसे सरल एवं अच्छा माध्यम है। प्रत्येक बच्चे का अधिकार होना चाहिए कि वह आधुनिक तकनीक से जुड़े और उसका लाभ प्राप्त करे। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के बच्चों के बीच शिक्षा में किसी प्रकार का भेद नहीं होना चाहिए। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं शिक्षा के क्षेत्र में इस अंतर को समाप्त करने का माध्यम बन रही हैं। प्रदेश में 70 हजार से अधिक बाल वाटिकाएं बन चुकी हैं। प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को खेल-खेल में सीखने की आदत डालने के उद्देश्य से बाल वाटिकाओं को विकसित किया जा रहा है। बाल वाटिकाओं के बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, बुक्स तथा अन्य सुविधाएं और पोषाहार उपलब्ध कराने का कार्य किया जाएगा। जिस देश का बचपन स्वस्थ है, उस देश का भविष्य स्वयं सशक्त और समर्थ बनता है।

कस्तूरबा गांधी विद्यालय का बढ़ा दायरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालय पहले 446 विकासखण्डों में कक्षा छह से आठवीं तक संचालित थे। आज 746 विकासखण्डों में यह विद्यालय संचालित हो रहे हैं। अब कक्षा छह से 12वीं तक बालिकाओं को एक ही कैम्पस में आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा दी जा रही है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आई0सी0टी0 लैब भी स्थापित की गई हैं। सरकार का प्रयास है कि हर बेटी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो। मिशन शक्ति के अन्तर्गत कक्षा 09 से 12वीं तक की बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 14,000 दिव्यांग बच्चों को एस्कॉर्ट अलाउंस, 23,000 से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेण्ड और ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर एवं हियरिंग एड जैसे कृत्रिम उपकरण उपलब्ध कराये गये हैं। 3,000 दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल बुक्स उपलब्ध करायी गयी है। माध्यमिक शिक्षा में 56 लाख बच्चे 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं। वर्ष 2017 से पहले परीक्षा तीन महीने चलती थी और परिणाम आने में भी लगभग तीन महीने लगते थे। इसका नतीजा यह था कि उत्तर प्रदेश के बच्चों को प्रदेश से बाहर प्रवेश लेने में कठिनाई होती थी। आज परीक्षा की अवधि को 06 महीने से घटाकर एक महीने के भीतर करने का कार्य किया गया है। समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम की सुविधा से बच्चे कहीं भी जाकर अपना प्रवेश ले सकते हैं। प्रदेश स्तर पर प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले माध्यमिक शिक्षा के 233 विद्यार्थियों को 01 लाख रुपये, टैबलेट और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। जनपद स्तर पर ऐसे 1,459 विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। यह शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को नई पहचान देने का प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षित उत्तर प्रदेश ही समर्थ उत्तर प्रदेश बनेगा और समर्थ उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर एवं विकसित उत्तर प्रदेश बनेगा। जब देश अपनी आजादी का शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा, तब आत्मनिर्भर और विकसित भारत के सपने को साकार करने का मार्ग हमारे शिक्षण केन्द्रों से होकर आगे बढ़ना चाहिए और वहां से नई ऊंचाई प्राप्त करनी चाहिए। सभी शिक्षक उत्तर प्रदेश की इस नई पहचान को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।

शिक्षक प्रेरणा के स्रोत हैं- गुलाब देवी

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि भारत में प्रत्येक वर्ष 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान शिक्षाविद्, दार्शनिक, भारत रत्न और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयन्ती के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना और अपना वन अध्यापन तथा ज्ञान के प्रसार के लिए समर्पित किया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन वन देश व प्रदेश की शिक्षा पद्धति आमूलचूल परिवर्तन किया है और बच्चों के वन में बदलते हुए देश के प्रति स्वयं को समर्पित करने के भाव के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा देता है। शिक्षक शिक्षा के दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्य शिक्षक प्रेरणा के स्रोत हैं। शिक्षक देश व प्रदेश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में परीक्षाएं नकल विहीन तथा समयबद्ध हुयी। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सुरक्षा के प्रति संवेदनशील है, यह उनकी सकारात्मक सोच को दर्शाता है

शिक्षक ज्ञान की ज्योति को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैंः- सन्दीप सिंह

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सन्दीप सिंह ने कहा कि यह वही धरा है जहां पर त्याग, कल्याण, एवं शिक्षा की धारा बहती है। शिक्षक ज्ञान की ज्योति को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। पठन-पाठन को शिक्षकों द्वारा आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। मुख्यमंत्री की नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है। यह परिवर्तन शिक्षा के भविष्य को साकार कर रहा है। शिक्षक दिवस पूर्व राष्ट्रपति, दार्शनिक एवं महान शिक्षाविद् भारतरत्न डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर मनाया जाता है। प्रदेश सरकार शिक्षकों का सम्मान शिक्षकों के कल्याण के प्रति निरन्तर कार्य कर रही है। शिक्षक बच्चों को निखारने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में शिक्षामित्रों, अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया गया है। परिवर्तन के दौर में आज की शिक्षा किस प्रकार होनी चाहिए इसका उदाहरण हमारी शिक्षा प्रस्तुत कर रही है। शिक्षा, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्राथमिकता का हिस्सा है और उसी को आगे बढ़ाने का निरन्तर प्रयास किया जा रहा है।

इस अवसर पर मत्स्य मंत्री संजय निषाद, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, ध्रुव कुमार त्रिपाठी, विधायक फतेह बहादुर सिंह, बिपिन सिंह, महेन्द्र पाल सिंह, राम चौहान, प्रदीप शुक्ल, राजेश त्रिपाठी, डॉ. विमलेश पासवान, इं. सरवन कुमार निषाद, गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश कुमार वास्तव, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक पार्थ सारथी सेनशर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


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