‘ओजी’, ‘धुरंधर’: प्रधानमंत्री मोदी ने एसआरसीसी में ‘जेन जी’ की बोलचाल वाले शब्दों का इस्तेमाल किया

‘ओजी’, ‘धुरंधर’: प्रधानमंत्री मोदी ने एसआरसीसी में ‘जेन जी’ की बोलचाल वाले शब्दों का इस्तेमाल किया

‘ओजी’, ‘धुरंधर’: प्रधानमंत्री मोदी ने एसआरसीसी में ‘जेन जी’ की बोलचाल वाले शब्दों का इस्तेमाल किया
Modified Date: September 5, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: September 5, 2026 10:36 pm IST

नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपने संबोधन में ‘ओजी’ जैसे ‘जेन जी’ के बीच लोकप्रिय शब्दों का इस्तेमाल किया और फिल्म ‘धुरंधर’ का भी संदर्भ दिया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह में मोदी ने 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर दिए अपने संबोधन को याद किया।

जहां ‘‘ओजी’’ (ओरिजिनल गैंगस्टर) एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल आम बोलचाल में ‘‘पुराने और असली खिलाड़ी’’, भरोसेमंद, अनुभवी या पुराने दौर की शैली वाले व्यक्ति के लिए किया जाता है तो वहीं “धुरंधर” का अर्थ दिग्गज या अपने क्षेत्र का माहिर व्यक्ति होता है।

मोदी ने कॉलेज के शताब्दी समारोह में अपने संबोधन के दौरान कहा, “एसआरसीसी के पूर्व छात्र बहुत खास रहे हैं… उन्होंने कॉलेज की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया। अगर मैं आपकी भाषा में कहूं, तो यहां के पूर्व छात्र ‘ओजी’ हैं।”

पूर्व छात्रों की प्रशंसा करते हुए मोदी ने कहा, “धुरंधर न हों, लेकिन धूम मचाई है।”

एसआरसीसी में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इन शब्दों का इस्तेमाल ऐसे समय में हुआ है, जब जंतर-मंतर पर हाल में हुए ‘जेन जी’ के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बाद भाजपा और उसके नेता युवा वर्ग से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री युवाओं तक संदेश पहुंचाने के लिए इंस्टाग्राम-शैली के वीडियो का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।

मोदी ने 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में एसआरसीसी का दौरा किया था और छात्रों के बीच उनके उस संबोधन को काफी लोकप्रियता मिली थी। खासकर 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले, जब वह भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, उनके भाषण ने काफी ध्यान आकर्षित किया था।

मोदी ने कहा कि उस समय उनके संबोधन ने ‘‘लहर’’ पैदा की थी और आज भी 13-14 साल बाद भी उसका प्रभाव बरकरार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘2013 में जब मैं एसआरसीसी आया था, तब मैंने एक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था। उस समय मैंने जो कुछ कहा था, वह मेरा दृढ़ विश्वास था। मैंने हमेशा उन बातों को अपने जीवन में उतारा है। देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने की भावना ही शब्दों के रूप में सामने आई थी। मैंने पानी से भरे गिलास का उदाहरण दिया था। कुछ लोग गिलास को आधा भरा देखते हैं, जबकि कुछ लोग उसे आधा खाली बताते हैं।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘मैंने कहा था कि ऐसे लोग हैं जो गिलास को पूरी तरह भरा हुआ देख सकते हैं—आधा पानी से और आधा हवा से। वह ऐसा समय था, जब देश में उम्मीद की कमी थी। इसलिए मैंने कहा था, ‘मैं इस गिलास को पूरी तरह भरा हुआ देखता हूं’।”

भाषा

देवेंद्र रंजन

रंजन

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