नेपाल ने भारत को अपना सबसे अहम साझेदार बताया;दोनों पक्ष संबंधों को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने पर सहमत

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नेपाल ने भारत को अपना सबसे अहम साझेदार बताया;दोनों पक्ष संबंधों को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने पर सहमत

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  • Publish Date - June 7, 2026 / 12:53 AM IST,
    Updated On - June 7, 2026 / 12:53 AM IST

नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को नेपाल के अपने समकक्ष शिशिर खनाल के साथ बैठक के दौरान कहा कि भारत और नेपाल के बीच ‘‘विशेष’’ संबंध हैं और इन संबंधों की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए आपसी जुड़ाव को ‘‘निर्णायक’’ रूप से आगे बढ़ाने का अवसर है।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने विकास सहयोग, संपर्क, व्यापार एवं पारगमन, ऊर्जा और लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करते हुए संबंधों को “नयी ऊंचाइयों” पर ले जाने का संकल्प जताया।

नेपाल के विदेश मंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बातचीत की।

खनाल ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को नयी दिल्ली की तीन दिवसीय यात्रा शुरू की। हालांकि, उनकी यह यात्रा नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की ओर से दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर हाल में की गई टिप्पणियों से उपजे विवाद की छाया में हुई।

द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने दोनों ‘‘देशों की पारस्परिक समृद्धि, प्रगति और कल्याण के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भावना’’ को दोहराया।

बैठक में खनाल ने कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों को ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ देता है और शाह नीत सरकार नयी दिल्ली के साथ ‘‘ठोस और सार्थक’’ बातचीत के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम पुरानी बातों का बोझ नहीं उठाते और अपने करीबी पड़ोसी एवं सबसे महत्वपूर्ण साझेदार के साथ वास्तव में परिवर्तनकारी संबंध बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।’’

क्षेत्र में अपने समग्र रणनीतिक हितों के संदर्भ में नेपाल भारत के लिए महत्वपूर्ण है और दोनों देशों के नेताओं ने सदियों पुराने ‘‘रोटी-बेटी’’ के संबंधों का अक्सर उल्लेख किया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘बातचीत सौहार्दपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और रचनात्मक माहौल में हुई, जो दोनों देशों के बीच अनूठे और विशेष संबंधों को दर्शाती है।’’

बैठक के बाद जयशंकर ने 2015 के भूकंप के बाद भारत की पुनर्निर्माण सहायता के तहत नेपाल में पूरी की गई 72 स्वास्थ्य सुविधाओं और 12 सांस्कृतिक धरोहर परियोजनाओं को डिजिटल माध्यम से सौंपा।

दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच व्यक्तिगत धन अंतरण को सुगम बनाने के लिए भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (एनपीआई) को जोड़ने वाली सुविधा की संयुक्त रूप से शुरुआत भी की।

जयशंकर और खनाल ने आपराधिक मामलों में भारत-नेपाल पारस्परिक विधिक सहायता समझौते (एमएलएए) को लागू करने के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने का स्वागत किया।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता सीमा-पार अपराधों से संबंधित जांच, अभियोजन और न्यायिक कार्यवाही की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए एक संस्थागत कानूनी ढांचा प्रदान कर भारत और नेपाल के लोगों को लाभ पहुंचाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति पर ‘‘संतोष’’ व्यक्त किया और नवोन्मेष, स्टार्टअप, डिजिटल एवं वित्तीय प्रौद्योगिकी तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की हाल की पहलों का स्वागत किया।

उसने कहा कि मंत्रियों ने बहुआयामी भारत-नेपाल साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयास तेज करने तथा इसे “नयी ऊंचाइयों” पर ले जाने पर सहमति जताई। उन्होंने आपसी हित के क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

जयशंकर ने खनाल के साथ अपनी बातचीत को “सार्थक” बताया और कहा कि “अनूठी” भारत-नेपाल साझेदारी पर विस्तृत चर्चा में विकास को लेकर सहयोग, संपर्क, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, संस्कृति और खेल शामिल रहे।

उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘हमारे लोगों की पारस्परिक प्रगति, समृद्धि और कल्याण के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।’’

बैठक में अपनी शुरुआती टिप्पणी में विदेश मंत्री ने दोनों पक्षों के करीबी द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘भारत और नेपाल के बीच बहुत विशेष संबंध हैं, जो लोगों के बीच जीवंत संबंधों, सीमा-पार संपर्क और साझा सांस्कृतिक तथा धार्मिक परंपराओं की मजबूत बुनियाद पर बने हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये संबंध साझा विश्वास, सद्भावना और पारस्परिक लाभ पर आधारित हैं। हमारे द्विपक्षीय संबंध व्यापार, वाणिज्य, निवेश, ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा, आपदा प्रतिक्रिया और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में लगातार विकसित हुए हैं।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज सहयोग और सहभागिता का बहुत स्पष्ट और मजबूत संदेश देना चाहता हूं। हमारा मानना है कि आज भारत-नेपाल संबंधों की दिशा को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने और हमारे संबंधों की पूरी क्षमता का लाभ उठाने का अवसर है।’’

जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्ष “अपनी लंबी और अनूठी खुली सीमा” पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए निकट सहयोग करते हैं।

भाषा

सिम्मी संतोष

संतोष