नेपाल बाढ़ : कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद 28 श्रद्धालु सुरक्षित लौटे

नेपाल बाढ़ : कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद 28 श्रद्धालु सुरक्षित लौटे

नेपाल बाढ़ : कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद 28 श्रद्धालु सुरक्षित लौटे
Modified Date: August 29, 2026 / 07:49 pm IST
Published Date: August 29, 2026 7:49 pm IST

तिरुपति (आंध्र प्रदेश), 29 अगस्त (भाषा) कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए आंध्र प्रदेश के 28 श्रद्धालु यात्रा पूरी करने के बाद सुरक्षित लौट आए हैं। यात्रा के दौरान वे अचानक आई बाढ़ में फंस गए थे।

तिरुपति स्थित एक निजी ट्रेवल एजेंसी के प्रबंध निदेशक पी. वेंकटरमण ने बताया कि समूह भारत से काठमांडू पहुंचा था और चीनी वीजा मिलने में देरी के कारण उन्हें करीब तीन दिन इंतजार करना पड़ा।

वेंकटरमण ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सुरक्षित तिरुपति पहुंच गया हूं। हमारी कुशलता के बारे में पूछने और हमारी सुरक्षा को लेकर चिंता जताने वाले सभी लोगों का धन्यवाद।’’

उन्होंने बताया कि वीजा मिलने के बाद तीर्थयात्री सुबह करीब साढ़े छह बजे काठमांडू से रवाना हुए। करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय करने और लगभग तीन घंटे की यात्रा के बाद वे पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक छोटे गांव के पास बाढ़ में फंस गए।

एक तीर्थयात्री ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा, ‘‘उस समय तक न तो बारिश हो रही थी और न ही बादल थे। मौसम साफ था और ग्रामीण अपने रोजमर्रा के काम में लगे थे। अचानक नदी में पानी का बहुत तेज बहाव आया और किसी को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है।’’

उन्होंने बताया कि पानी के तेज बहाव में वाहन बहने लगे और आपस में टकराने लगे। उन्होंने बताया कि खतरे की सूचना मिलने के बाद बस चालक ने तुरंत वाहन रोक दिया और आगे नहीं बढ़े।

तीर्थयात्री ने कहा कि खतरे का पता चलने के दो-तीन मिनट के भीतर चालक ने बस को मोड़ लिया और पहाड़ी की ओर ले गया। उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद गांव के पास स्थित एक पुल भी ढह गया और नदी किनारे स्थित कई घर तथा गांव बह गए।

तीर्थयात्री के अनुसार, ट्रेवल एजेंसी की ओर से होटल से पांच बसें रवाना हुई थीं, जिनमें से दो सुरक्षित लौट आईं, जबकि एक बस फंस गई थी लेकिन उसमें सवार लोग अगले दिन लौटने में सफल रहे।

उसके अनुसार, पश्चिम बंगाल के लोगों को ले जा रही दो बसें लापता हो गईं और अभी तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

तीर्थयात्री ने बताया कि भारत सरकार और ट्रेवल एजेंसी लगातार तीर्थयात्रियों के संपर्क में रहे और संकट की स्थिति में उन्हें सहायता उपलब्ध कराई।

भाषा शफीक अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में