नेपाल बाढ़: गुजरात से जुड़े लापता लोगों की संख्या बढ़कर 17 हुई
नेपाल बाढ़: गुजरात से जुड़े लापता लोगों की संख्या बढ़कर 17 हुई
अहमदाबाद, 27 अगस्त (भाषा) नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद गुजरात से जुड़े लापता लोगों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। राज्य सरकार फंसे हुए लोगों की मदद के लिए केंद्र के साथ समन्वय बढ़ा रही है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) द्वारा जारी नयी सूची में 11 लापता या संपर्क से बाहर लोगों की पुरानी सूची में छह और नाम जोड़े गए हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इन 17 लोगों में अहमदाबाद, आणंद, राजकोट, वलसाड, सूरत, खेड़ा, अमरेली, गांधीनगर और वडोदरा से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं, जिनमें से कई भारतीय मूल के विदेशी नागरिक हैं।
एसईओसी की सूची के अनुसार, इनमें से चार लोग गांधीनगर के, तीन-तीन सूरत और खेड़ा के, दो-दो वडोदरा और आणंद के रहने वाले हैं जबकि एक-एक व्यक्ति अहमदाबाद, राजकोट और अमरेली का निवासी है।
इस सूची में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के वे नागरिक भी शामिल हैं, जो मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं।
बयान में कहा गया कि सूची में शामिल कई लोग नेपाल के रास्ते ‘कैलाश मानसरोवर’ यात्रा पर थे, जबकि अन्य लोगों को आखिरी बार रसुवागढ़ी-केरुंग सीमा पर ‘मित्रता पुल’ के पास या निकटवर्ती बागमती क्षेत्र में देखा गया था।
एसईओसी की पिछली रिपोर्ट में 12 लोगों को लापता बताया गया था, लेकिन अधिकारियों ने बाद में वलसाड की रहने वाली रोमा इंटवाला से संपर्क स्थापित कर लिया और पाया कि वह नेपाल में सुरक्षित हैं। इसके बाद लापता या संपर्क से बाहर लोगों की संख्या घटकर 11 रह गई थी।
गुजरात सरकार के प्रवक्ता और मंत्री जीतू वाघानी ने बताया कि नेपाल में आई अचानक बाढ़ से प्रभावित गुजरातियों और अन्य भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं, जबकि लापता लोगों के संबंध में मिली सभी जानकारियां संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई हैं।
वाघानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं तथा गुजरात सरकार इस संकट के दौरान राज्य के लोगों और उनके परिवारों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
भाषा
सुमित सुरेश
सुरेश

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