ईडी की नयी समिति ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे उभरते खतरों के खिलाफ 800 मामले दर्ज किए

ईडी की नयी समिति ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे उभरते खतरों के खिलाफ 800 मामले दर्ज किए

ईडी की नयी समिति ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे उभरते खतरों के खिलाफ 800 मामले दर्ज किए
Modified Date: May 2, 2026 / 12:03 am IST
Published Date: May 2, 2026 12:03 am IST

नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भीतर ‘जोखिम मूल्यांकन प्रबंधन समिति’ का गठन किये जाने से लगभग सात महीनों में डिजिटल अरेस्ट, विदेशी हस्तक्षेप, राष्ट्रीय हित के विरुद्ध ‘लॉबिंग’ और बौद्धिक संपदा धोखाधड़ी जैसे ‘‘उभरते’’ खतरों के खिलाफ धन शोधन के लगभग 800 मामले दर्ज किये गए हैं।

जोखिम मूल्यांकन प्रबंधन समिति (आरएएमसी) की अध्यक्षता दिल्ली स्थित मुख्यालय में तैनात एजेंसी के एक विशेष निदेशक रैंक के अधिकारी द्वारा की जाती है।

एजेंसी के नये दिशानिर्देशों के अनुसार, आरएएमसी को अक्टूबर 2025 से लेकर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के कड़े प्रावधानों के तहत किसी भी मामले को लेने से पहले उसकी जांच करने का अधिकार दिया गया है।

इस समिति का गठन साइबर और क्रिप्टो से संबंधित धोखाधड़ी, विदेशी वित्तपोषण और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे उभरते खतरों की पहचान करने के लिए किया गया है।

ईडी की एक रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘अक्टूबर 2025 से अब तक आरएएमसी की कुल 91 बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें कुल 794 मामलों पर गौर किया गया है।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, देखने में आया है कि पीएमएलए के तहत मौजूदा मामलों में नकदी-आधारित भ्रष्टाचार के मामले अब जटिल, डिजिटल और वैश्विक स्तर पर परस्पर जुड़े वित्तीय अपराधों की ओर ‘‘स्थानांतरित’’ हो गये हैं, जिसके लिए उन्नत फोरेंसिक, डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग क्षमताओं की आवश्यकता होती है।

भाषा शफीक सुभाष

सुभाष


लेखक के बारे में