अरुणाचल प्रदेश में पौधे की नई प्रजाति की खोज
अरुणाचल प्रदेश में पौधे की नई प्रजाति की खोज
ईटानगर, 29 सितंबर (भाषा) वनस्पति विज्ञानियों ने अरुणाचल प्रदेश के शि-योमी जिले में पौधे की एक नई प्रजाति की खोज की है, जो पूर्वी हिमालय में पाई जाने वाली समृद्ध वनस्पति विविधता को रेखांकित करती है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, डिडीमोकैरपस नौटियाली नाम की यह नयी प्रजाति जेस्नेरिएसी परिवार से संबंधित है और जिले में किए गए वनस्पति सर्वेक्षण के दौरान इसकी खोज हुई।
इस प्रजाति का हाल में वैज्ञानिक पत्रिका ‘ताइवानिया’ में औपचारिक रूप से वर्णन किया गया है। इसके साथ ही यह अरुणाचल प्रदेश की वनस्पतियों में एक नई प्रजाति के रूप में शामिल हो गई है।
शोधकर्ताओं ने क्षेत्र से जुटाए गए नमूनों की विस्तृत जांच तथा वैज्ञानिक साहित्य और हर्बेरियम सामग्री से तुलना के बाद इस पौधे की पहचान की।
यह छोटा पौधा नम चट्टानी सतहों, सड़क किनारे की दीवारों और झरनों के आसपास, 1,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले उपोष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में उगता है। इसकी ऊंचाई केवल करीब आठ सेंटीमीटर होती है। इसमें चमड़े जैसी पत्तियां और विशिष्ट नीले-बैंगनी रंग के फूल होते हैं।
वैज्ञानिक विवरण के अनुसार यह पौधा डिडीमोकैरपस अल्बिफ्लोरस जैसा दिखता है, लेकिन कई विशेषताओं में उससे अलग है। इनमें काफी छोटा तना, बहुत छोटे या अनुपस्थित पत्ती डंठल, चमड़े जैसी पत्ती की सतह, छोटा बाह्यदलपुंज, छोटा नीला-बैंगनी पुष्पदलपुंज और बिना रोएंदार अंडाशय शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इन विशेषताओं के आधार पर इसे विज्ञान के लिए पहले से अज्ञात प्रजाति के रूप में स्थापित किया गया।
जी. बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (जीबीपीएनआईएचई) के मधुसूदन खनाल के नेतृत्व वाली टीम में संस्थान, सिक्किम विश्वविद्यालय, कलियाबोर कॉलेज और पासीघाट स्थित जवाहरलाल नेहरू कॉलेज के शोधकर्ता शामिल हैं।
इस प्रजाति का नाम डिडीमोकैरपस नौटियाली जीबीपीएनआईएचई के पूर्व निदेशक प्रोफेसर सुनील नौटियाल के सम्मान में रखा गया है। यह नाम हिमालयी पर्यावरण अनुसंधान और संरक्षण में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया है।
शोधकर्ताओं ने फिलहाल आईयूसीएन की लाल सूची के मानदंडों के तहत डी. नौटियाली को ‘डेटा डिफिशिएंट’ श्रेणी में रखा है क्योंकि इसके विलुप्त होने के खतरे का आकलन करने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इस खोज की अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मेन ने भी सराहना की। उन्होंने इसे राज्य की प्राकृतिक विरासत में ‘‘एक और उल्लेखनीय जुड़ाव’’ बताया।
भाषा
राखी नरेश
नरेश

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