एनजीटी ने उत्तराखंड को तीर्थयात्रा मार्गों को लेकर रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
एनजीटी ने उत्तराखंड को तीर्थयात्रा मार्गों को लेकर रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड सरकार को केदारनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री और गोमुख के तीर्थयात्रा मार्गों की वहन क्षमता पर अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
पीठ फरवरी 2023 के उस आदेश को लागू करने के अनुरोध वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इन तीर्थ स्थलों के रास्तों की वहन क्षमता का अध्ययन करने का निर्देश दिया गया था ताकि मार्गों के साथ पर्यावरण मानदंडों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन को रोका जा सके।
इससे पहले, अधिकरण ने राज्य के अधिकारियों को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील इन क्षेत्रों की वहन क्षमता के अनुरूप आगंतुकों, खच्चरों और वाहनों की संख्या के आकलन सहित एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार ने एनजीटी को सूचित किया था कि भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) वहन क्षमता रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसे फरवरी 2026 तक प्रस्तुत किये जाने की बात कही गई थी।
सात अप्रैल को, एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने गौर किया कि राज्य ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों के संबंध में दो अप्रैल को एक हलफनामा प्रस्तुत किया था।
इसमें मंदिर समितियों, होटल संगठनों, परिवहन संचालकों, घोड़ा-खच्चर संगठनों और अन्य स्थानीय समूहों जैसे हितधारकों के साथ परामर्श करना, विभिन्न विभागों से सुझाव प्राप्त करने के लिए डब्ल्यूआईआई रिपोर्ट का वितरण करना और रिपोर्ट का सारांश प्रकाशित करना शामिल था।
पीठ ने गौर किया कि हलफनामे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त छह महीने का समय भी मांगा गया है। पीठ ने कहा, ‘‘इस रिपोर्ट (हलफनामे) में उत्तराखंड की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह महीने का समय देने का अनुरोध किया गया है, लेकिन हमारा मानना है कि छह महीने उचित नहीं है और प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए।’’
एनजीटी ने राज्य को अगली सुनवाई की तारीख 21 जुलाई से कम से कम एक सप्ताह पहले एक ‘‘उचित प्रगति रिपोर्ट’’ दाखिल करने का निर्देश दिया।
भाषा आशीष वैभव
वैभव

Facebook


