एनजीटी ने कुसुमपुर पहाड़ी पुनर्वास योजना को लेकर केंद्र सरकार और उपराज्यपाल को नोटिस भेजा
एनजीटी ने कुसुमपुर पहाड़ी पुनर्वास योजना को लेकर केंद्र सरकार और उपराज्यपाल को नोटिस भेजा
नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली के उपराज्यपाल और अन्य से जवाब मांगा है, जिसमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की कुसुमपुर पहाड़ी में प्रस्तावित झुग्गी पुनर्वास योजना के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया है।
योजना के अनुसार, कुसुमपुर पहाड़ी में झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) बस्ती के स्थान पर 18.96 एकड़ भूमि पर 2,800 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाना है। इस बस्ती में करीब एक लाख लोग रहते हैं।
एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें दावा किया गया है कि यह योजना अस्वीकार्य है क्योंकि यह राष्ट्रीय राजधानी में वसंत विहार और वसंत कुंज के बीच लगभग 690 एकड़ क्षेत्र में स्थित अरावली जैव-विविधता पार्क के अधिसूचित संरक्षित वन के अंदर प्रस्तावित है।
याचिका में कहा गया है कि कुसुम पहाड़ी नामक पहाड़ी को जे.जे. बस्ती घोषित कर दिया गया है, क्योंकि मजदूर धीरे-धीरे उस पर अतिक्रमण करके वहां बस गए।
हाल ही में दिए गए आदेश में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा, ‘आवेदन में यह भी कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर आवासीय इकाइयां बनाने के बाद आबादी में इजाफे के कारण पर्यावरण का क्षरण होगा और इससे दक्षिणी दिल्ली के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।’
एनजीटी ने कहा, ‘प्रतिवादियों को सुनवाई की अगली तारीख (13 दिसंबर) से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किए जाएं।
इस मामले में केंद्र सरकार, डीडीए, उपराज्यपाल कार्यालय, केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) और रिज प्रबंधन बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश

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