निकोबार परियोजना व्यावसायिक, जैव विविधिता खतरे में: रमेश

निकोबार परियोजना व्यावसायिक, जैव विविधिता खतरे में: रमेश

निकोबार परियोजना व्यावसायिक, जैव विविधिता खतरे में: रमेश
Modified Date: June 3, 2026 / 10:53 am IST
Published Date: June 3, 2026 10:53 am IST

नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव को पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान में जिस स्वरूप में ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना की परिकल्पना की गई है, वह एक भारी-भरकम व्यावसायिक परियोजना है जिससे क्षेत्र की जैव विविधिता खतरे में पड़ गई है।

रमेश और यादव के बीच पिछले कुछ महीनों में इस विषय पर कई बार पत्राचार हो चुका है।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने पत्र में कहा, ’10 मई, 2026 को लिखे गए मेरे पत्र में अपील की गई कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के पारिस्थितिक प्रभावों का व्यापक तरीके से आकलन करते समय कानून का अक्षरशः पालन किया जाए, खासकर तब जब मार्च 2022 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट में स्वयं यह कहा गया था कि यह केवल एक प्रारंभिक त्वरित अध्ययन है।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे खुशी है कि आपने यह स्वीकार किया है कि पर्यावरणीय मंजूरी व्यापक ईआईए अध्ययनों पर आधारित नहीं थी, जिनमें तीन मौसमों के प्राथमिक आंकड़ों का उपयोग किया जाता, बल्कि प्राथमिक आंकड़े केवल ‘एक ही मौसमी चक्र’ के दौरान एकत्र किए गए थे।’

रमेश ने कहा, ‘मेरे पिछले पत्र के आपके उत्तर का एक बड़ा हिस्सा इस दावे को समर्पित है कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन संस्थानों के पास ऐतिहासिक आंकड़ों के संग्रह उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग उनके द्वारा तैयार की गई प्रभाव आकलन रिपोर्ट में किया गया है।’

कांग्रेस महासचिव रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर विमर्श अचानक बदल गया है। उन्होंने कहा कि इसके गंभीर और निर्विवाद पारिस्थितिकी दुष्प्रभावों के स्पष्ट प्रमाण सामने आने के बाद अब केंद्र सरकार इसकी कथित रणनीतिक आवश्यकता पर जोर दे रही है।

रमेश ने कहा, ‘‘मैंने अलग से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर सुझाव दिया है जैसा कि कुछ प्रतिष्ठित रक्षा विशेषज्ञों ने भी कहा है कि भारत के रणनीतिक उद्देश्यों को ग्रेट निकोबार में ‘आईएनएस बाज’ के विस्तार और पूरे अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में अंडमान और निकोबार कमान की अन्य परिसंपत्तियों को मजबूत करके कहीं बेहतर तरीके से हासिल किया जा सकता है। ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना, जिस रूप में अभी प्रस्तावित है, मूल रूप से एक भारी-भरकम व्यावसायिक परियोजना है।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि आप ग्रेट निकोबार की अद्वितीय जैव विविधता से भली-भांति परिचित हैं -जिसका कुछ हिस्सा ज्ञात है, कुछ धीरे-धीरे सामने आ रहा है और कुछ अब भी अज्ञात है, जिसके लिए और गहन जमीनी अध्ययन की आवश्यकता है। यह सब अब खतरे में पड़ गया है। कई आवासीय क्षेत्र और प्रजातियां तो ऐसी हैं, जो शायद हमारे द्वारा उनकी पूरी ‘इन्वेंटरी’ तैयार किए जाने से पहले ही नष्ट हो जाएंगी।’

भाषा हक रंजन अमित

अमित


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