उच्चतम न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने ‘उद्योग’ की परिभाषा पर सुनवाई शुरू की

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उच्चतम न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने ‘उद्योग’ की परिभाषा पर सुनवाई शुरू की

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  • Publish Date - March 17, 2026 / 11:49 AM IST,
    Updated On - March 17, 2026 / 11:49 AM IST

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत ‘‘उद्योग’’ शब्द की परिभाषा से संबंधित विवादास्पद मुद्दे पर सुनवाई शुरू की।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी इस मामले में अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं।

न्यायालय ने 16 फरवरी को नौ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा विचार किए जाने वाले व्यापक मुद्दों को निर्धारित किया था।

पीठ ने पहले कहा था, ‘‘हमारी सुविचारित राय में, हमें निम्नलिखित मुद्दों का निर्णय करना है: यह निर्धारित करने के लिए कि कोई उद्यम ‘उद्योग’ की परिभाषा में आता है, क्या बेंगलुरु जलापूर्ति मामले में न्यायमूर्ति वी. कृष्ण अय्यर द्वारा पैराग्राफ 140 से 144 में निर्धारित परीक्षण को वैध माना जाए?’’

उसने कहा था, ‘‘क्या औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम, 1982 प्रभावी रूप से लागू नहीं हुआ था और क्या उद्योग संहिता ने ‘उद्योग’ शब्द पर कोई कानूनी प्रभाव डाला?’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वह इस बात पर भी विचार करेगा कि क्या सरकारी विभागों या संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही सामाजिक कल्याणकारी गतिविधियों या योजनाओं को औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत औद्योगिक गतिविधियां माना जा सकता है।

वर्ष 2017 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि इस मुद्दे के ‘‘गंभीर और व्यापक प्रभावों’’ को ध्यान में रखते हुए उसके समक्ष दायर अपीलों को नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए।

मई 2005 में सर्वोच्च न्यायालय की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(जे) में ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा की व्याख्या के संबंध में मामले को एक वृहद पीठ के पास भेज दिया था।

पीठ ने कहा था कि वृहद पीठ को सभी कानूनी प्रश्नों की पड़ताल सभी दृष्टिकोणों और गहराई से करनी होगी।

भाषा गोला शोभना

शोभना