निरंजन पटनायक की आत्मकथा में ओडिशा की राजनीति के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया

निरंजन पटनायक की आत्मकथा में ओडिशा की राजनीति के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया

निरंजन पटनायक की आत्मकथा में ओडिशा की राजनीति के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया
Modified Date: July 2, 2026 / 08:58 am IST
Published Date: July 2, 2026 8:58 am IST

भुवनेश्वर, दो जुलाई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता निरंजन पटनायक की आत्मकथा ‘समय साक्षी’ का बुधवार को विमोचन किया गया।

इस पुस्तक में ओडिशा में उनकी राजनीतिक यात्रा, निजी अनुभवों और दशकों की जनसेवा का विवरण है।

पुस्तक में निरंजन पटनायक ने अपने राजनीतिक जीवन की यादों, संघर्षों, उपलब्धियों और अनुभवों के साथ-साथ पिछले ढाई दशकों में ओडिशा की बदलती राजनीतिक तस्वीर तथा राज्य में ‘‘कांग्रेस के लगातार कमजोर होने’’ का विस्तार से उल्लेख किया है।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कई ऐसे घटनाक्रम का भी जिक्र किया है, जिन्हें वह ओडिशा में कांग्रेस की लोकप्रियता घटने और लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने की प्रमुख वजह मानते हैं।

पुस्तक के एक अध्याय में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एवं असम के पूर्व राज्यपाल जे.बी. पटनायक का उल्लेख करते हुए उन्हें विद्वान, कुशल प्रशासक और दक्ष राजनीतिज्ञ बताया है।

हालांकि, उन्होंने लिखा है कि जे.बी. पटनायक की पूर्व महाधिवक्ता इंद्रजीत रे के साथ निकटता ने उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया।

पटनायक लिखते हैं, ‘‘मैंने 1995 से 1999 तक मुख्यमंत्री रहे जे.बी. पटनायक को सलाह दी थी कि वह इंद्रजीत रे से दूरी बना लें, क्योंकि रे कथित दुष्कर्म के प्रयास के एक मामले का सामना कर रहे थे लेकिन उन्होंने मेरी सलाह पर ध्यान नहीं दिया और अंततः इस प्रकरण ने जे.बी. पटनायक की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया।’’

आत्मकथा में ओडिशा की राजनीति में नवीन पटनायक के उदय और उन राजनीतिक परिस्थितियों का भी विश्लेषण किया गया है, जिनके बीच कांग्रेस ने राज्य में अपना जनाधार खो दिया।

निरंजन पटनायक ने पुस्तक के विमोचन की जानकारी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए इसे अपने जीवन का एक भावुक क्षण बताया।

उन्होंने लिखा, ‘‘आज ‘समय साक्षी : जाने साधारण ओड़िआरा कथा’ के विमोचन के साथ मुझे अपनी यह यात्रा आप सभी के साथ साझा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। यह मेरे लिए अत्यंत भावुक पल है।’’

भाषा

खारी सिम्मी

सिम्मी


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