इस तरह के शीर्षक से किसी वर्ग को अपमानित नहीं किया जा सकता: न्यायालय ने ‘घूसखोर पंडत’ मामले पर कहा

इस तरह के शीर्षक से किसी वर्ग को अपमानित नहीं किया जा सकता: न्यायालय ने 'घूसखोर पंडत' मामले पर कहा

इस तरह के शीर्षक से किसी वर्ग को अपमानित नहीं किया जा सकता: न्यायालय ने ‘घूसखोर पंडत’ मामले पर कहा
Modified Date: February 12, 2026 / 02:49 pm IST
Published Date: February 12, 2026 2:49 pm IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ‘घूसखोर पंडत’ शीर्षक पर अप्रसन्नता जताते हुए फिल्म निर्माता नीरज पांडे से बृहस्पतिवार को कहा कि आप इस तरह के शीर्षक का इस्तेमाल करके समाज के किसी वर्ग का अपमान नहीं कर सकते।

न्यायालय ने ओटीटी मंच ‘नेटफ्लिक्स’ पर मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म की रिलीज पर रोक लगाए जाने संबंधी याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने फिल्म के खिलाफ दायर याचिका पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और पांडे को नोटिस जारी किये।

पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह के शीर्षक का इस्तेमाल करके आप समाज के एक वर्ग को अपमानित क्यों कर रहे हैं? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक अलग बात है, लेकिन यह किसी को भी अपमानित करने का अधिकार नहीं देती। यह नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध है। जब तक आप हमें बदला हुआ शीर्षक नहीं बताते, हम आपको फिल्म रिलीज करने की अनुमति नहीं देंगे… हमने सोचा था कि फिल्म निर्माता, पत्रकार आदि जिम्मेदार लोग होते हैं।’’

न्यायालय ने पांडे को यह हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया कि फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ समाज के किसी भी वर्ग को अपमानित नहीं करती।

सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि अभी तक कोई नया शीर्षक तय नहीं किया गया है और उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि नया शीर्षक ऐसा होगा जिससे कोई विवाद नहीं होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘आप हलफनामा दें कि आप यह शीर्षक नहीं रखेंगे। हम अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत दिए गए अधिकार का पूर्ण सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ प्रतिबंध हैं। हम बंधुत्व के पहलू को शामिल करना चाहते हैं। यह संविधान के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है। हम इस मामले को बंधुत्व से जोड़ना चाहते हैं।’’

उसने कहा, ‘‘जब समाज में पहले से ही दरारें मौजूद हैं, तो इस तरह के मामले में संयम क्यों नहीं बरता जा सकता? किसी को बदनाम क्यों करना है? समाज के एक वर्ग को इस तरह के नाम से क्यों अपमानित करना चाहिए? जागरूक होना एक बात है, लेकिन लोगों को अपमानित करना और इस तरह की अशांति पैदा करना (उचित नहीं)…..आप अशांति को और बढ़ा रहे हैं।’’

इस मामले में आगे की सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म जाति एवं धर्म आधारित रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती है और सार्वजनिक व्यवस्था, सांप्रदायिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों के लिए खतरा है।

फिल्म निर्माता नीरज पांडे द्वारा निर्मित ‘घूसखोर पंडत’ की घोषणा ‘नेटफ्लिक्स’ ने हाल में मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान की थी।

फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुसरत भरूचा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम और अक्षय ओबेरॉय अभिनय कर रहे हैं।

‘ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया’ के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा ने एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें नेटफ्लिक्स पर फिल्म की रिलीज रोकने का निर्देश दिए जाने का न्यायालय से अनुरोध किया गया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक और कथानक प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक हैं और ये ब्राह्मण समुदाय को अपमानजनक तरीके से चित्रित करते हैं।

जनहित याचिका में ‘पंडत’ शब्द के ‘घूसखोर’ शब्द के साथ इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई है।

मंगलवार को नेटफ्लिक्स इंडिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा था कि फिल्म का नाम बदला जाएगा।

भाषा सिम्मी सुरेश

सुरेश


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