कच्चातिवु को वापस लेने के लिए भाजपा नीत केंद्र सरकार ने कोई ठोस प्रयास नहीं किया: स्टालिन

कच्चातिवु को वापस लेने के लिए भाजपा नीत केंद्र सरकार ने कोई ठोस प्रयास नहीं किया: स्टालिन

कच्चातिवु को वापस लेने के लिए भाजपा नीत केंद्र सरकार ने कोई ठोस प्रयास नहीं किया: स्टालिन
Modified Date: July 2, 2024 / 05:51 pm IST
Published Date: July 2, 2024 5:51 pm IST

चेन्नई, दो जुलाई (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने मंगलवार को कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकाल के बावजूद, कच्चातिवु द्वीप को वापस लेने के लिए ‘कोई ठोस’ प्रयास नहीं किया गया।

इस द्वीप को 1974 में भारत द्वारा श्रीलंका को सौंप दिया गया था।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे पत्र में स्टालिन ने हाल के हफ्तों में श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों को पकड़े जाने की घटनाओं में अभूतपूर्व वृद्धि होने पर चिंता जताई और राज्य के मछुआरों के पारंपरिक अधिकारों को बनाए रखने के लिए स्थायी समाधान तलाशने के वास्ते ठोस कदम उठाने की अपील की।

उन्होंने बताया कि श्रीलंकाई नौसेना ने एक जुलाई को 25 मछुआरों के साथ दो मोटर चालित नौकाओं और मछली पकड़ने वाली दो गैर-पंजीकृत नौकाओं को भी पकड़ा था।

स्टालिन ने कच्चातीवु द्वीप श्रीलंका को सौंपे जाने का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, “दिनांक 27.06.2024 के पत्र में आपने उल्लेख किया है कि 1974 में तत्कालीन केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच एक समझौते के बाद यह मुद्दा उत्पन्न हुआ था।”

उन्होंने कहा, “ इस संबंध में, मैं यह बताना चाहूंगा कि द्रमुक नीत राज्य सरकार ने कच्चातीवु समझौते का पुरजोर विरोध किया था और तमिलनाडु विधानसभा तथा संसद में इसका विरोध किया था। यह तथ्य सर्वविदित है कि इस संबंध में राज्य सरकार से उचित परामर्श नहीं किया गया था।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र ने भारतीय मछुआरों के अधिकारों और हितों को खतरे में डालते हुए द्वीप को पूरी तरह से श्रीलंका को सौंप दिया।

स्टालिन ने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकार बनने के बावजूद द्वीप को पुनः प्राप्त करने के लिए कोई ठोस और सार्थक प्रयास नहीं किया गया है और मुद्दे का इस्तेमाल सिर्फ चुनावी बयानबाजी के लिए किया गया।

उन्होंने कहा, “समय की मांग है कि तमिलनाडु के मछुआरों की समस्याओं को कम किया जाए और इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।’

भाषा नोमान सुभाष

सुभाष


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