अदाणी समूह के खिलाफ सेबी की जांच में ठोस प्रगति नहीं, सरकार का संरक्षण है : कांग्रेस

अदाणी समूह के खिलाफ सेबी की जांच में ठोस प्रगति नहीं, सरकार का संरक्षण है : कांग्रेस

अदाणी समूह के खिलाफ सेबी की जांच में ठोस प्रगति नहीं, सरकार का संरक्षण है : कांग्रेस
Modified Date: February 18, 2026 / 11:34 am IST
Published Date: February 18, 2026 11:34 am IST

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका की एक गैर सरकारी संस्था की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बुधवार को दावा किया कि अदाणी समूह के खिलाफ लंबित ज्यादातर मामलों में सेबी की जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है और इस कारोबारी समूह को सरकार का संरक्षण मिला हुआ है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि बेनामी धन का उपयोग करके अदाणी समूह में बड़ी हिस्सेदारी जुटाने का काम अदाणी के करीबी सहयोगियों चांग चुंग-लिंग और नासिर अली शाबान अहली द्वारा किया गया।

अदाणी समूह ने कांग्रेस के इस नए दावे पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, हालांकि अतीत में उसने अपने खिलाफ लगे अनियमितता के आरोपों को सिरे से खारिज किया था।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘नए खुलासों से यह सामने आया है कि बेनामी धन का उपयोग करके अदाणी समूह में बड़ी हिस्सेदारी जुटाने का काम अदाणी के करीबी सहयोगियों चांग चुंग-लिंग और नासिर अली शाबान अहली द्वारा किया गया। अमेरिकी संस्था ओसीसीआरपी ने ऐसे सबूत पाए हैं, जिनमें स्विस बैंक के समक्ष चांग और अहली द्वारा दिए गए स्वीकारोक्ति बयान भी शामिल हैं।’

उन्होंने दावा किया कि इनसे पता चलता है कि दोनों के पास अदाणी कंपनियों में पहले से कहीं अधिक बड़ी हिस्सेदारी थी और वे 2023 तक विभिन्न हेज फंड के माध्यम से लगभग तीन अरब डॉलर के शेयरों के मालिक थे।

रमेश ने कहा, ‘इसी बीच, 24 में से 22 लंबित मामलों में, जो अदाणी समूह के प्रतिभूति लेन-देन से संबंधित हैं, सेबी की जांच में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है।

उन्होंने दावा किया कि अदाणी महाघोटाले का दायरा सेबी की जांच से कहीं अधिक व्यापक है। उनके अनुसार, जैसा कि कांग्रेस पार्टी ने जनवरी-मार्च 2023 के दौरान अपने “हम अदानी के हैं कौन” सवालों की श्रृंखला में प्रधानमंत्री से पूछा था, इसमें कई पहलू भी शामिल हैं।

उनका कहना है, ‘प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर कंपनियों पर दबाव बनाना इसमें शामिल है ताकि वे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में अपनी संपत्तियां बेचें, जिससे प्रधानमंत्री के पसंदीदा कारोबारी समूह को लाभ पहुंचे। पक्षपातपूर्ण निजीकरण, जिसने हवाईअड्डों और बंदरगाहों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अदाणी के एकाधिकार को बढ़ावा दिया और जो आगे चलकर सीमेंट, बिजली और रक्षा उपकरण जैसे अन्य क्षेत्रों तक फैल सकता है। बांग्लादेश, श्रीलंका और अन्य देशों में अदाणी को ठेके दिलाने के लिए कूटनीतिक संसाधनों का दुरुपयोग किया गया।’

रमेश ने कहा कि कांग्रेस इन सभी पहलुओं की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग लगातार करती रही है और स्वाभाविक रूप से, प्रधानमंत्री ने इस मांग को टाल दिया है।

उन्होंने कहा ‘‘इतना ही नहीं, अदाणी समूह प्रधानमंत्री के पूर्ण सहयोग के साथ एक के बाद एक नए व्यवसायों में अपना विस्तार करता जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी वास्तविक मुख्य ताकत प्रधानमंत्री का संरक्षण है।’

उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक उद्यमिता और राजनीतिक निकटता के जरिए होने वाले परस्पर लाभकारी व्यावसायिक विस्तार में अंतर है।

भाषा हक सिम्मी मनीषा

मनीषा


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