वायु प्रदूषण के कारण मौत होने के बारे में कोई निश्चित आंकड़ा नहीं : सरकार

वायु प्रदूषण के कारण मौत होने के बारे में कोई निश्चित आंकड़ा नहीं : सरकार

वायु प्रदूषण के कारण मौत होने के बारे में कोई निश्चित आंकड़ा नहीं : सरकार
Modified Date: January 29, 2026 / 10:02 pm IST
Published Date: January 29, 2026 10:02 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) सरकार ने राज्यसभा में बृहस्पतिवार को बताया कि वायु प्रदूषण के कारण मौतें होने की बात को स्थापित करने वाला कोई निश्चित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन को यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) से सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

कांग्रेस सदस्य प्रमोद तिवारी ने मंत्रालय से श्वसन संबंधी ‘क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज’ (सीओपीडी) से प्रतिवर्ष होने वाली मौतों के बारे में प्रश्न पूछा था और यह जानना चाहा था कि क्या वायु प्रदूषण एक स्वास्थ्य संकट बन गया है?

सिंह ने इसके जवाब में कहा, ‘देश में ऐसा कोई निश्चित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है जिससे वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों का सीधा संबंध स्थापित किया जा सके।’

उन्होंने कहा कि जनवरी 2019 में शुरू किए गए एनसीएपी का उद्देश्य 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 130 शहरों (गैर-प्राप्ति शहरों और दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों) में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है।

मंत्री ने बताया कि 2017-18 के आधार वर्ष की तुलना में 2024-25 में 103 शहरों में पीएम10 की सांद्रता में कमी देखी गई है। उनके मुताबिक, इनमें से 64 शहरों में पीएम10 के स्तर में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है और 25 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।

कुल 22 शहरों ने राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को पूरा किया है और उनमें पीएम10 की सांद्रता 60 मिलीग्राम/मी घन से कम है।

उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनसीएपी) के कार्यान्वयन ढांचे की लगातार समीक्षा और निगरानी कर रही है ताकि इसे और मजबूत बनाया जा सके।

मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम को संशोधित किया गया है और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा सुधार उपायों को अपनाने के लिए वायु गुणवत्ता चुनौती पद्धति (एक्यूएमसी) को लागू किया गया है।

उन्होंने बताया कि 12 वायु प्रदूषकों के लिए एनएएक्यूएस को 2009 में अधिसूचित किया गया था।

भाषा माधव पवनेश नोमान

नोमान


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