निज्जर हत्याकांड में भारत सरकार की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला: कनाडा पुलिस
निज्जर हत्याकांड में भारत सरकार की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला: कनाडा पुलिस
नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) कनाडा में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की 2023 में हुई हत्या की जांच कर रहे अधिकारियों को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिनसे इस मामले में भारतीय सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता साबित होती हो। कनाडाई पुलिस की एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
कनाडाई पुलिस का यह बयान कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उन आरोपों का खंडन करता है, जिनसे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गये थे।
अमेरिकी अधिकारियों ने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर कनाडा में निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
अमेरिकी अधिकारियों के इस आरोप के कुछ घंटों बाद रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की उपायुक्त लिसा मोरलैंड का यह बयान आया है।
‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ नाम से चलाए गये संयुक्त अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून प्रवर्तन एजेंसी 24 लोगों को पकड़ चुकी है।
अधिकारियों के अनुसार, ये सभी ‘‘भारत से संचालित तीन अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोहों’’ से जुड़े हैं। इन गिरोहों पर निज्जर की हत्या समेत हत्या, जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य कई गंभीर अपराधों के आरोप हैं।
जांच से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए मोरलैंड ने कनाडा के ‘सीबीसी न्यूज’ को बताया कि जांचकर्ताओं को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारी शामिल थे।
ट्रूडो के आरोपों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इस संगठित अपराध जांच, लगाए गए आरोपों और अभियोग के आधार पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि भारतीय अधिकारी इसमें शामिल थे।’’
मोरलैंड ने कहा कि भारत सरकार ने जांच में पूरा सहयोग किया।
निज्जर की ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में खटास आ गई थी। ट्रूडो ने इस हत्या के पीछे भारत सरकार की भूमिका होने का आरोप लगाया था।
भारत ने इन आरोपों को ‘‘बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित’’ बताते हुए खारिज कर दिया था।
अक्टूबर 2024 में कनाडा द्वारा निज्जर मामले में भारत के उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को कथित तौर पर जोड़ने की कोशिश के बाद भारत ने अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था। इसके जवाब में भारत ने कनाडा के भी इतने ही राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था।
हालांकि, पिछले साल अप्रैल में संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी की जीत के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार हुआ है।
मोरलैंड ने कहा कि जांच में यह सामने आया है कि बिश्नोई गिरोह कनाडा और अन्य स्थानों पर जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी, अपहरण और हिंसा जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है।
बिश्नोई 2015 से भारत की जेल में निरुद्ध है, जबकि संघीय अन्वेषण ब्यूरो (एफबीआई) ने बराड़ पर 50,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम घोषित किया है।
आरसीएमपी के आयुक्त माइक ड्यूहेम ने कहा कि एजेंसियों ने उन ‘संगठित अपराधियों’ की गतिविधियों को बाधित किया है।
निज्जर प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) का सरगना था और भारत द्वारा उसे आतंकवादी घोषित किया गया था।
भाषा
देवेंद्र प्रशांत
प्रशांत

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