मंत्री नागेंद्र के खिलाफ अभियोजन के लिए राज्यपाल से मंजूरी मांगे जाने की जानकारी नहीं : प्रियंक खरगे

मंत्री नागेंद्र के खिलाफ अभियोजन के लिए राज्यपाल से मंजूरी मांगे जाने की जानकारी नहीं : प्रियंक खरगे

मंत्री नागेंद्र के खिलाफ अभियोजन के लिए राज्यपाल से मंजूरी मांगे जाने की जानकारी नहीं : प्रियंक खरगे
Modified Date: August 22, 2026 / 05:13 pm IST
Published Date: August 22, 2026 5:13 pm IST

बेंगलुरु, 22 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने शनिवार को कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंत्री बी नागेंद्र के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत से संपर्क किया है।

प्रियंक ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय एजेंसी को पहले राज्य सरकार को पत्र लिखना होगा।

बताया जाता है कि सीबीआई ने हाल में राज्यपाल से नागेंद्र के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगी है। नागेंद्र पर राज्य संचालित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के गबन के मामले में आरोप हैं।

मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘उन्होंने किस आधार पर मंजूरी मांगी है? हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है। अगर सीबीआई अभियोजन की मांग करती है तो उसे पहले राज्य सरकार को पत्र लिखना होगा।’’

उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने पिछले मुख्य सचिव राजनेश गोयल को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि कोई भी मामला उसे न सौंपा जाए और यदि कोई मामला दिया जाता है तो जांच अधिकारियों सहित पूरा स्टाफ राज्य सरकार को उपलब्ध कराना होगा।

प्रियंक ने कहा, ‘‘अगर हमें जांच अधिकारी उपलब्ध कराने हैं तो इसका मतलब है कि जांच हम ही कर रहे हैं।’’

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसा कानून बनाया है, जिसके तहत सीबीआई को किसी भी जांच या अभियोजन के लिए राज्य सरकार की अनुमति या राय लेना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ आया है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने सीधे राज्यपाल को क्या दिया है, इसकी मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।’’

कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन बाधित हुई। विपक्षी भाजपा और जद(एस) के सदस्यों ने सदन में प्रदर्शन करते हुए नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की।

नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में धन के गबन के आरोपों के बाद पिछली सिद्धरमैया सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्हें तीन अगस्त को डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में फिर शामिल किया गया। वह फिलहाल योजना एवं सांख्यिकी मंत्री हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में बल्लारी के विधायक नागेंद्र को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया था। बेंगलुरु की विशेष अदालत ने उसी साल अक्टूबर में उन्हें जमानत दे दी थी। इस मामले में ईडी और सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र में नागेंद्र को आरोपी बनाया गया है।

विपक्ष द्वारा नागेंद्र के मुद्दे पर पदयात्रा निकालने की योजना के बारे में पूछे जाने पर प्रियंक खरगे ने कहा, ‘‘उन्हें करने दीजिए, किसने मना किया है। इससे पहले भी उन्होंने बिदादी मार्च और मुडा मार्च किया था। अब वे रायचूर से बल्लारी तक मार्च की बात कर रहे हैं। उन्हें करने दीजिए। लेकिन उनकी पदयात्रा का कारण क्या है?’’

जब उनसे कहा गया कि यह पदयात्रा एक भ्रष्ट व्यक्ति को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने और उसे हटाने की मांग को लेकर है, तो प्रियंक ने कहा, ‘‘क्या उन्होंने चंदू लामाणी (भाजपा विधायक) को हटा दिया है? उन्हें लोकायुक्त ने पकड़ लिया था। वह भी नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान सदन में नारे लगा रहे थे। उन्हें देखकर मुझे समझ नहीं आया कि हंसूं या रोऊं। लोकायुक्त के जाल में फंसा व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।’’

भाषा अमित शफीक

शफीक


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