नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी संघर्ष या युद्ध की स्थिति में ‘‘कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है।’’
जनरल सुब्रमणि ने कहा कि भारत एक समय में केवल एक ही संघर्ष की तैयारी करने का जोखिम नहीं उठा सकता, क्योंकि भविष्य के युद्धक्षेत्र एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय होंगे, आपस में जुड़े होंगे और कई क्षेत्रों में एक साथ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।
यहां आयोजित एक रक्षा सम्मेलन (डिफकॉन) को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में “सीखने की गति और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता” युद्धक क्षमता का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि जो पक्ष तेजी से सीखता है और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को उतनी ही तेजी से ढाल लेता है, वही जीत हासिल करेगा।
देश के तीसरे प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में 31 मई को पदभार संभालने वाले जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने ‘बीयूआईएलडी (बिल्ड)’ के पांच सूत्रीय मंत्र की रूपरेखा पेश की।
सीडीएस के अनुसार, ‘बी’ का अर्थ बेटलफील्ड (युद्धक्षेत्र) है, जो सभी क्षेत्रों में अधिक पारदर्शी, आपस में जुड़ा और अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ‘यू’ का अर्थ अंडरस्टेंडिंग द इकनॉमिक्स ऑफ वॉर (युद्ध की अर्थव्यवस्था को समझना) है, जो खुद बदलाव के दौर से गुजर रही है। ‘आई’ का अर्थ इंटीग्रेशन ऑफ टेक्नालॉजी, डेटा एंड इंडस्ट्री (प्रौद्योगिकी, आंकड़ों और उद्योग का एकीकरण) है, जो निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
उनके मुताबिक, ‘एल’ का अर्थ लर्निंग एंड एडोप्टेशन (सीखना और परिस्थितियों के अनुरूप ढलना) है, जो भविष्य के युद्ध जीतने और युद्धक बढ़त हासिल करने में अहम होगा। वहीं ‘डी’ का अर्थ डिलीवरी एट स्केल (बड़े पैमाने पर आपूर्ति एवं उपलब्धता) है, जो रणनीतिक रूप से लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता तय करेगा।
उन्होंने कहा, “मेरे विचार से यही वह कड़ी है, जो भारत की रक्षा संबंधी महत्वाकांक्षाओं को भविष्य के युद्धक्षेत्रों से जोड़ती है।”
जनरल सुब्रमणि ने ‘डिफकॉन’ में कहा कि युद्ध का स्वरूप “हमारी समझ में आने की गति से भी अधिक तेजी से बदल रहा है।”
यह कार्यक्रम न्यूज18 नेटवर्क ने आयोजित किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘अब युद्धक्षेत्र केवल अग्रिम मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश के आंतरिक हिस्सों तक फैल गया है। ऐसे में संघर्ष के दौरान कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है और युद्ध में केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि पूरा देश शामिल होता है।’’
उन्होंने अपनी बात के समर्थन में रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण दिया।
भाषा खारी वैभव
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